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Raag Kamod, Sargam geet, Chota khyaal, Tana mana varu, #Raagkamod #kamod #raag #raga #classicalmusictutoriyal राग कामोद बहुत ही मधुर और प्रचलित राग है। इस राग में मल्हार अंग, हमीर अंग और कल्याण अंग की छाया स्पष्ट रूप से दिखाई देती है साथ ही केदार और छायानट की झलक भी दिखाई देती है। इसलिये यह राग गाने में कठिन है। ग म प ग म रे सा - यह कामोद अंग कहलाता है। इस राग में रिषभ-पंचम की संगती के साथ-साथ ग म प ग म रे सा यह स्वर समूह राग वाचक है। यह स्वर संगतियाँ राग कामोद का रूप दर्शाती हैं - सा म रे प (मल्हार अंग); रे रे प ; ग म प ग म रे सा (कामोद अंग); म् प ध प (केदार अंग) ; ग म ध ध प (हमीर अंग); ग म प ग म रे सा (कामोद अंग); प ध प सा' सा' रे' सा' (छायानट अंग); सा' रे' सा' सा' ध ध प (कल्याण अंग) ; म् प ध म् प ; ग म प ग म रे सा ; Raag Kamod Parichay- स्वर दोनों मध्यम। शेष शुद्ध स्वर। जाति- सम्पूर्ण - सम्पूर्ण , वक्र थाट- कल्याण वादी/संवादी- पंचम/रिषभ समय- रात्रि का प्रथम प्रहर Chota khyaal lyrics- तन मन वारु गुरु चरनन पर जद पाऊं दरस , बलि बलि होजाऊं मन कुसुम सु कर गुरु पदअर्चन एक भाव धर मंगल गांव