У нас вы можете посмотреть бесплатно किरण बेदी, अगर एक जूता खो जाये : Learn Hindi with subtitles - Story for Children "BookBox.Com" или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
Have you ever lost a shoe and gone looking for it? Not Kiran Bedi. Not Gandhiji. Get our FREE App for Android: https://bit.ly/2oAUev9 and for iOS: https://apple.co/2Isv5th Subscribe for new videos every week!: https://www.youtube.com/user/bookboxi... More Hindi AniBooks: • सोमा क्या बोये? Learn Hindi with subtitles... More Kiran Bedi AniBooks: • किरण बेदी, शुक्रिया सेक्रेटरी साहब Learn ... अगर एक जूता खो जाये जैसे ही ट्रेन प्लैटफ़ॉर्म पर पहुंची, मैं सबसे नज़दीकी ज़नाना-डिब्बे की तरफ़ लपकी। डिब्बा खचाखच भरा था, बड़ी मुश्किल से खड़े होने की जगह मिल पाई। उन दिनों टेनिस-मैच खेलने के लिए मुझे काफ़ी सफ़र करना होता था। जैसे ही ट्रेन स्टेशन से चली, मैंने चारों ओर देखा तो पाया कि कुछ महिलाएं मुझे अजीब नज़रों से घूर-घूर कर देख रही थीं। अचानक, उनमें से एक महिला उठी और अपनी छतरी से मुझे मारने लगी। बस फिर क्या था, जिस महिला के हाथ जो भी लगा, वो उसी से मुझे मारने लगीं। वो सब चिल्ला रहीं थीं इन लफ़ंगों ने तो, जीना मुश्किल कर रखा है। उस गड़बड़ में मेरी समझ में आया कि वे सब मुझे लड़का समझ रही थीं। पिटते-पिटते मुझे यह खयाल आया कि मैंने पैंट कमीज़ और जूते पहन रखे हैं। और मेरे बाल भी लड़कों जैसे छोटे-छोटे हैं। पिटते-पिटते मैं चिल्ला रही थी, मेरी बात सुनिए, मैं लड़की हूं... मेरी बात का यकीन कीजिए...। लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी, और पीटते हुए मुझे डिब्बे के दरवाज़े की तरफ़ धकेलने लगीं। वो मुझे दरवाज़े तक ले आयीं। मैंने दरवाज़े को कसकर पकड़ लिया, लेकिन इसी धक्कम धक्के में मेरा एक जूता फिसलकर नीचे पटरी पर जा गिरा। मैंने अपनी पूरी ताकत से दरवाज़े को पकड़ रखा था, लेकिन फिर भी किसी तरह मैंने दूसरा जूता भी उतारकर नीचे फेंक दिया। इसलिए कि जिसे भी मिले, जूतों की जोड़ी मिले, ताकि वो उनका इस्तेमाल तो कर पाए। अगला स्टेशन आने तक मैं दरवाज़े से चिपकी रही, और जैसे ही प्लैटफ़ॉर्म आया, उस पर जा गिरी। प्लैटफ़ॉर्म का सीमेंट का फ़र्श था तो सख्त, लेकिन महिलाओं की धक्कामुक्की झेलने के बाद, वो मुझे काफ़ी आरामदेह लगा। इस घटना के कई महीने बाद मैंने कहीं पढ़ा कि एक बार गांधीजी ने भी ऐसा ही किया था। ट्रेन में सफ़र करते हुए जब, उनकी एक चप्पल पटरी पर गिर गई तो उन्होंने तुरन्त ही दूसरी भी फेंक दी। स्टेशन आने पर वो बिना रुके और बिना ही चिन्ता किए कि वो नंगे पांव हैं, मुस्कुराते हुए, अपने मेज़बान की तरफ़ बढ़ गए। जब, उनके मेज़बान ने पूछा कि आप नंगे पैर क्यों हैं, तो उन्होंने पूरा किस्सा सुनाया। और कहा, "मुझे खुशी है कि कोई तो चप्पलों को इस्तेमाल कर पाएगा।" Story: Kiran Bedi Story Adaptation: Ananya Parthibhan Illustrations: M Kathiravan Music: Acoustrics (Students of AR Rahaman) Translation: Madhu B Joshi Narration: Kiran Bedi WEBSITE: http://www.bookbox.com FACEBOOK: / bookboxinc INSTAGRAM: / bookboxinc TWITTER: / bookboxinc #BookBox #BookBoxHindi #Learn2Read