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Amalaki Ekadashi 2026 Date: आमलकी एकादशी व्रत कब है? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त आमलकी एकादशी 2026 | तिथि, व्रत विधि, महत्व और पारण समय Amalaki Ekadashi 2026 कब रखें? अभी नोट करें सही डेट और पूजा मुहूर्त Amalaki Ekadashi 2026: इस पावन एकादशी व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और धार्मिक महत्व जानिए इस वीडियो में। आमलकी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वीडियो में जानें: • आमलकी एकादशी 2026 कब है • पूजा का शुभ मुहूर्त • व्रत विधि और पारण समय • धार्मिक महत्व अगर वीडियो पसंद आए तो Like 👍, Share 🔁 और Channel Subscribe जरूर करें। #AmalakiEkadashi2026 #EkadashiVrat #VishnuBhakti #HinduVrat #EkadashiDate #BhaktiVideo #DharmikJankari #Festival2026 Amalaki Ekadashi 2026 🙏 आमलकी एकादशी व्रत कब रखा जाएगा? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और धार्मिक महत्व इस वीडियो में। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इस पावन दिन व्रत जरूर रखें। ✨ Follow करें ऐसे ही धार्मिक वीडियो के लिए ❤️ #AmalakiEkadashi #Ekadashi2026 #VishnuJi #HinduFestival #DharmikVideo #Bhakti #VratKatha Amalaki Ekadashi 2026 Date: कब किया जाएगा आमलकी एकादशी व्रत? अभी नोट करें तिथि और शुभ मुहूर्त हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर व्रत किया जाता है और अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान किया जाता है। इससे साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन में आमलकी एकादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के संग आंवले के पेड़ की पूजा-अर्चना का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को जीवन में सभी सुख मिलते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से बिगड़े काम पूरे होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आमलकी एकादशी की तिथि पर शुभ मुहूर्त के बारे में। आमलकी एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Amalaki Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, आमलकी एकादशी व्रत 27 फरवरी को किया जाएगा। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 27 फरवरी को देर रात 12 बजकर 33 मिनट पर फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर आमलकी एकादशी 2026 व्रत पारण का टाइम (Amalaki Ekadashi 2026 Vrat Paran Time) एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। ऐसे में 28 फरवरी को व्रत पारण करने का समय सुबह 06 बजकर 47 मिनट से 09 बजकर 06 मिनट पर समापन होगा। इन बातों का रखें ध्यान एकादशी से एक रात पहले सात्विक भोजन करें। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा जरूर करनी चाहिए। व्रत कथा का पाठ करें। मंदिर में अन्न-धन आदि का दान करें। मंदिर की सफाई का विशेष ध्यान रखें। किसी से वाद-विवाद न करें। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस एकादशी को आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के सहित आंवले की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्चे मन से आमलकी एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है मान्यताओं के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के पेड़ की पूजा करना अति शुभ होता है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने सृष्टि की रचना के वक्त आंवले को पेड़ के रूप में प्रतिष्ठित किया था। इसी कारणवश आंवले के पेड़ में ईश्वर का वास माना गया है और इसलिए आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर की जाती है। शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी करने वाले व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत का पुण्य एक हजार गौदान के फल के समान होता है। आमलकी एकादशी 2026 व्रत विधि (Amalaki Ekadashi 2026 Vrat Vidhi) • एकादशी से 1 दिन पहले सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण ना करें। • एकादशी के दिन प्रात: काल उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर ले। • इसके पश्चात भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। • इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें अथवा उनके सामने घी का दीपक जलाएं। • इसके पश्चात भगवान विष्णु को आंवला प्रसाद के स्वरूप में अर्पित करें। • पूजा हो जाने के बाद आंवले के वृक्ष के नीचे नवरत्न युक्त कलश स्थापित करें। • धूप, दीप, रोली, चंदन आदि से आंवले के वृक्ष की पूजा करें। • पूजा के बाद ब्राह्मण एवं जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। • अगले दिन यानी द्वादशी के दिन सुबह उठकर स्नान कर ले एवं स्नान करने के पश्चात भगवान विष्णु की पूजा करें। • इसके बाद शुभ मुहूर्त पर पारण कर लें। • यदि संभव हो तो इस दिन गरीबों में दान जरूर करें क्योंकि इससे अत्यंत पुण्य की प्राप्ति होती है।