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Everybody thinks that Karna was greater than Arjuna because of today's TV Serials. Because they only glorify Karna. Here is a poem written by me for Gandivadhari Arjuna.... the Avatar of MuniShreshtha Nar.🥰🥰 Instagram Link : / bhardwajdeepankur Twitter Link : / devildeep7 Lyrics by me - ना दिव्य कुंडल मेरे कान में ना कोई कवच मेरा वस्त्र था ना दिव्य कुंडल मेरे कान में ना कोई कवच मेरा वस्त्र था ना वासुदेव ना गांडीव, धर्म ही मेरा शस्त्र था कभी श्रेष्ठ बनने की होड़ नहीं कभी श्रेष्ठ बनने की होड़ नहीं उत्तम में संतोष था सामर्थ्य था बाहुओ में और प्रत्यंचा की टंकार ही मेरा उदघोष था तीन बार अंगराज को पछाड़ा फिर भी अहन्कार में खोया कभी ना होश था तीन बार अंगराज को पछाड़ा फिर भी अहन्कार में खोया कभी ना होश था कर्ण को मारना अधर्म नहीं वो उसके कर्मों का दोष था कहते हैं युद्ध में हनुमान मेरी ध्वजा पर और माधव मेरे आगे थे कहते हैं युद्ध में हनुमान मेरी ध्वजा पर और माधव मेरे आगे थे किंतु विराट युद्ध में मैं अकेला था तब क्यों सेना लेकर भागे थे दुर्योधन को बचाया गंधर्वों से जब कर्ण मद में चूर था दुर्योधन को बचाया गंधर्वों से जब कर्ण मद में चूर था द्रुपद से भी प्राणों की रक्षा की थी अंगराज फिर किस बात का गुरूर था निहत्थे पर बाण चलाने के पक्ष में मेरा कभी ना मर्म था निहत्थे पर बाण चलाने के पक्ष में मेरा कभी ना मर्म था और तक्षक को बाण पर जो बिठाया अंगराज वो भी तो अधर्म था कर्ण को हर्ष था माता-पिता का स्पर्श था कर्ण को हर्ष था माता-पिता का स्पर्श था सारा जीवन मैं रहा वनवास में फिर भी ना कहा जीवन में संघर्ष था माधव ने कहा था ऐसा वक्त आएगा मैं होऊंगा पक्षपाती और अर्जुन अधर्मी कहाएगा भूल कर धर्म-कर्म को हर कोई कर्ण-कर्ण गाएगा ना पढ़े होंगे शास्त्र कभी थूकेंगे चांद पर ये दूर से ना पढ़े होंगे शास्त्र कभी थूकेंगे चांद पर ये दूर से कहेंगे गलत मुझे सीखकर महाभारत एकता कपूर से !