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*“डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस में नाकामयाब होने के कारण: जल्दी अमीर होने की सोच”* डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस आज के समय में लाखों लोगों को आकर्षित करता है, क्योंकि इसमें कम पूंजी से बड़ा सपना देखने का अवसर मिलता है। लेकिन हकीकत यह है कि बहुत-से लोग इस बिज़नेस में जुड़ने के कुछ ही समय बाद निराश होकर बाहर हो जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है **जल्दी अमीर होने की सोच**। जब कोई व्यक्ति इस बिज़नेस को शॉर्टकट समझ लेता है, तभी से उसकी नाकामी की कहानी शुरू हो जाती है। जल्दी अमीर बनने की चाह रखने वाले लोग यह मान लेते हैं कि डायरेक्ट सेलिंग में ज्यादा मेहनत, सीखने या धैर्य की जरूरत नहीं है। वे सोचते हैं कि बस कुछ लोगों को जोड़ लिया और पैसा अपने आप बहने लगेगा। लेकिन जब शुरुआती दौर में रिजल्ट नहीं मिलता, टीम नहीं बनती या लोग “ना” कह देते हैं, तो उनका उत्साह टूट जाता है। वे बिना पूरे सिस्टम को समझे ही यह निष्कर्ष निकाल लेते हैं कि यह बिज़नेस काम का नहीं है। ऐसी सोच रखने वाले लोग ट्रेनिंग, प्रोडक्ट नॉलेज और सेल्फ-डेवलपमेंट को समय की बर्बादी समझते हैं। उन्हें लगता है कि सीखने से ज्यादा जरूरी है पैसा कमाना। जबकि डायरेक्ट सेलिंग एक *लोगों का बिज़नेस* है, जिसमें कम्युनिकेशन, धैर्य और नेतृत्व क्षमता का विकास बहुत जरूरी होता है। जो व्यक्ति सीखने की प्रक्रिया से भागता है, वह लंबे समय तक टिक नहीं पाता। जल्दी अमीर होने की सोच का एक और नुकसान यह है कि व्यक्ति गलत तरीके अपनाने लगता है। वह ओवर-प्रॉमिस करता है, झूठे सपने दिखाता है और लोगों को जल्दी जोड़ने की कोशिश करता है। इससे कुछ समय के लिए टीम तो बन सकती है, लेकिन वह टिकाऊ नहीं होती। जब टीम के लोग भी वैसी ही अपेक्षाओं के साथ जुड़ते हैं और रिजल्ट नहीं देखते, तो वे भी बिज़नेस छोड़ देते हैं। इसका असर पूरे नेटवर्क पर पड़ता है और बिज़नेस कमजोर हो जाता है। डायरेक्ट सेलिंग में नाकामी का कारण बिज़नेस मॉडल नहीं, बल्कि *मानसिकता* होती है। यह एक लॉन्ग-टर्म प्रोफेशन है, जिसमें शुरुआत में मेहनत और बाद में परिणाम मिलते हैं। जो लोग इसे नौकरी या लॉटरी की तरह देखते हैं, वे जल्दी हार मान लेते हैं। जबकि जो लोग इसे एक स्किल-बेस्ड बिज़नेस समझकर धैर्य, अनुशासन और निरंतरता के साथ करते हैं, वही आगे चलकर सफलता प्राप्त करते हैं। अगर वीडियो अच्छा लगा तो लाइक करें।