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माता अन्नपूर्णा की परीक्षा | अगस्त्य ऋषि और नारायण की रहस्यमयी कथा माता पार्वती अर्थात माता अन्नपूर्णा की इच्छा होती है कि वे अपने हाथों से साधु-संतों और ऋषियों को भोजन कराएं। भगवान शिव सभी साधु महात्माओं को आमंत्रित करते हैं। माता अन्नपूर्णा अनेक प्रकार के पंच पकवान बनाती हैं। सभी साधु संत भोजन कर तृप्त हो जाते हैं, लेकिन माता का भोजन फिर भी समाप्त नहीं होता। तब भगवान शिव अगस्त्य ऋषि को भोजन के लिए आमंत्रित करते हैं। अगस्त्य ऋषि भोजन करते हैं और माता अन्नपूर्णा का सारा भोजन समाप्त कर देते हैं। माता फिर से भोजन बनाती हैं — और फिर से सब समाप्त हो जाता है। ऐसा तीन बार होता है। माता अन्नपूर्णा को चिंता सताने लगती है कि यदि अगस्त्य ऋषि का पेट नहीं भरा तो लोग अन्नपूर्णा माता पर हँसेंगे। माता शिवजी से क्षमा मांगती हैं। शिवजी उन्हें नारायण का स्मरण करने को कहते हैं और स्वयं भगवान नारायण को सारी बात बताते हैं। भगवान नारायण साधु का वेश धारण कर अगस्त्य ऋषि के पास भोजन करने बैठते हैं। भोजन के बाद नारायण कहते हैं — “अब मुझे तृप्ति मिली।” तभी जाकर अगस्त्य ऋषि का पेट भरता है। यह कथा हमें सिखाती है कि अन्न, अहंकार और करुणा — तीनों का संतुलन ही जीवन है। माता अन्नपूर्णा की जय 🙏 Mata Annapurna Katha, Annapurna Devi Katha, Augustya Rishi Katha, Annapurna Mata Story in Hindi, Shiv Parvati Katha, Bhagwan Narayan Katha, Hindu Mythology Stories, Sanatan Dharma Katha, Devi Annapurna Mahima, Annapurna Mata Bhajan, Annapurna Mata Ki Katha, Indian Mythology Hindi, Dharmik Katha Hindi, Spiritual Stories in Hindi, Pauranik Katha, Bhakti Katha, Hindu Religious Story, Annapurna Mata Temple Story, Vedic Stories Hindi, Sanatan Katha