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सब ठीक था .. बस वह जीना भूल गई थी | थोड़ा जी ले - सुमन बाजपेयी | Life Lesson Story | Simmi Saini @KathaSahityaSimmiSaini “थोड़ा जी ले” एक संवेदनशील कथा है, जो बताती है कि हर दर्द का कारण शरीर नहीं होता—कभी-कभी हम जीना ही टाल देते हैं। यह कहानी रुककर खुद से पूछने पर मजबूर करती है— क्या हम सच में जी रहे हैं, या बस इलाज के बीच साँस ले रहे हैं? लेखिका - सुमन बाजपेयी जन्मः नई दिल्ली शिक्षाः एम.ए. हिंदी ऑनर्स व पत्रकारिता का अध्ययन लेखिका, पत्रकार, संपादक, अनुवादक पिछले 32 सालों से कहानी, कविता व महिला विषयों, पर्यटन तथा बाल-लेखन में संलग्न 800 से अधिक कहानियां व कविताएं, 1000 से अधिक लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित आकाशवाणी से निरंतर कहानियों का प्रसारण कैलीफोर्निया की पत्रिका इंडिया करंट्स में कॉलम पर्यटन पर प्रकाशित कृतियां उपन्यास: द नागा स्टोरी कहानी संग्रह: ’खाली कलश’, ‘ठोस धरती का विश्वास’, ‘अग्निदान’, ‘एक सपने का सच होना,’ ‘पीले झूमर’, ‘फोटोफ्रेम में कैद हंसी’ आदि । बाल पुस्तकः ‘पिंजरा,’ ‘सीक्रेट कोड और अन्य कहानियां,’ ‘गार्डन ऑफ बुक्स व अन्य कहानियां आदि । पेरेटिंग: ‘अपने बच्चे को विजेता बनाएं,’ ‘सफल अभिभावक कैसे बनें’ जीवनी तथा लोककथाएँ । अनुवादः 160 से अधिक पुस्तकों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। पूर्व संपादक चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट (हिंदी विभाग) पूर्व असिस्टेंट एडीटर सखी पूर्व एसोसिएट एडीटर मेरी संगिनी पूर्व एसोसिएट एडीटर फोर्थ डी वूमेन #hindikahanian #emotionalstory #hearttouchingstory #kahaniya #hindistories #स्वरसिम्मीसैनी #kathasahityapro