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#history #prayagraj #shringverpur कहाँ है श्रृंगवेरपुर धाम ? इलाहाबाद रेलवे स्टेशन से गंगा नदी का पुल पार करने के बाद फाफामऊ की ओर से प्रस्थान करते हुए लखनऊ मार्ग पर लगभग 37 किलोमीटर की दूरी पर गंगा नदी के किनारे एक ऊंचे पहाड़ी नुमा टीले पर स्थित है श्रृंगी ऋषि का प्रसिद्ध मंदिर। इन्हीं के नाम पर इस धाम को श्रृंगवेरपुर के नाम से जाना जाता है। जो प्रयागराज के सोरांव तहसील से 25 किलोमीटर दूर सिंगरौर नामक स्थान पर बसा हुआ है। श्रृंगवेरपुर धाम की पौराणिक कथा क्या है? कश्यप ऋषि के पुत्र महर्षि विभण्डक के कठोर तप से भयभीत होकर देवलोक की अप्सरा उर्वशी को ध्यान भंग करने हेतु भेजा गया। तपस्या भंग होने से विभण्डक ऋषि एवं उर्वशी के संसर्ग से जिस बालक का जन्म हुआ उसके माथे पर सींग जैसा उभार था। इसी के कारण इस बालक का नाम पडा- ऋष्यश्रृंग । जो बाद में अपने कठोर तप से श्रृंगी ऋषि कहलाये। अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियां थी कौशल्या, कैकेई एवं सुमित्रा। उस समय रानी कौशल्या की मात्र एक पुत्री थी शांता। जिसे रानी कौशल्या की सगी बहन वर्षिनी जो अंग देश के राजा रोमपद उर्फ चित्ररथ की पत्नी थी ने गोंद ले लिया था। राजा दशरथ एवं रोमपद रिश्तेदार होने के साथ ही परम मित्र भी थे। बाल्मीकि रामायण में राजकुमारी शांता का कोई वर्णन प्राप्त नहीं होता किंतु दक्षिण के पुराणों में शांता के चरित्र का वृहद वर्णन किया गया है। एक बार अंग देश में भयानक सूखा पड़ा। नदी तालाब पोखर सभी सूख गए। इस आपदा से मुक्ति दिलाने के लिए महर्षि श्रृंगी से अनुरोध किया गया। महर्षि श्रृंगी के मार्गदर्शन से पूरे अंग देश में विधि विधान से हवन पूजन एवं यज्ञ किया गया। परिणाम सुखद निकला और घनघोर वर्षा हुई। नदी तालाब पोखर सभी जलाशय पानी से भर गए। अंग देश के राजा रोमपद ने प्रसन्न होकर राजा दशरथ से गोंद ली हुई पुत्री राजकुमारी शांता का विवाह श्रृंगी ऋषि से संपन्न कराया। इस तरह से महारानी शांता अंग देश के वैभव का त्याग करके महर्षि श्रृंगी के साथ जीवन यापन करने के लिए गंगा नदी के किनारे इस रमणीय स्थल पर आ बसी। (अधिक जानकारी के लिए वीडियो देखें?) श्रृंगवेरपुर का इतिहास क्या है ? इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 1977 से 1981 ईसवी के बीच डॉक्टर बी बी लाल के निर्देशन में यहां पर खुदाई की गई। जिन से प्राप्त वस्तुएं एवं संरचना का गहराई से अध्ययन करने के पश्चात कई संस्कृतियों के विकास एवं नष्ट होने की जानकारी मिली। उत्खनन कार्य में 1000 ईसवी पूर्व यानी आज से 2000 साल पहले प्रयोग किए गए मिट्टी के बर्तनों के अवशेष, मिट्टी को सपाट करने के लिए धातु के बनाए गए धूसर, तांबे के बने हुए 3 बड़े कलश जैसी कई अन्य वस्तुएं प्राप्त हुई। यहां पर पाए गए आयताकार तालाब शुंग काल से संबंधित बताए जाते हैं। यह तालाब पक्की ईंटों से बनाए गए थे। इन तालाबों में पानी नालियों के द्वारा गंगा नदी से आता था और दूसरे छोर से पुन: गंगा नदी में निकाल दिया जाता था। गंगा से आने वाले पानी को पीने योग्य बनाने के लिए जल संशोधन की प्राचीन प्रणाली का प्रयोग किया जाता था। भारत में जितने भी प्राचीन स्थलों की खुदाई की गई है उसमें इस तालाब को सबसे बड़ा बताया जाता है। जो इस बात का प्रमाण है कि शुंग काल में नगरीकरण अपने उत्कर्ष पर था। कुछ मिट्टी की मूर्तियां एवं लाल रंग के मिट्टी के बर्तन गुप्त युग से संबंधित पाए गए। इसके अलावा कन्नौज गढ़वाल वंश के राजा गोविंद चंद्र की 13 रजत मुद्राएं और मिट्टी में रखे हुए कुछ आभूषण मिले। इसके बाद ये स्थान एक लंबे समय तक वीरान रहा। इतिहासकार ऐसा मानते हैं कि गंगा में आने वाली भयानक बाढ़ के कारण यहां पर रहने वाले लोगों ने हमेशा के लिए पलायन कर लिया। आज यह स्थान भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है। जिन्हें इतिहास में रुचि है उन लोगों के लिए यहां पर प्राचीन काल में प्रयोग की जाने वाली हाइड्रोलिक प्रणाली को देखने एवं उस पर शोध करने के लिए काफी संरचनाएं उपलब्ध हैं। यहां से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है राम चौरा घाट। बताया जाता है कि यही वह स्थान है जहां पर गंगा को पार करने से पहले श्री राम ने पूरी रात विश्राम किया था। अगले दिन केवट ने उन्हें नाव से गंगा पार ले जाकर प्रयाग की भूमि तक पहुंचाया था। आज भी लोग यहां दूर-दूर से गंगा में दीप प्रवाहित करने के लिए आते हैं। जिसका अर्थ यह बताया जाता है कि जिस तरह से श्रीराम ने अपने पिता के मान सम्मान एवं वचन के लिए सभी राजसी सुख सुविधाओं का त्याग करके बैरागी का जीवन धारण किया उसी तरह से गंगा में माया मोह दुख चिंता का प्रतीक यह दीप प्रवाहित कर रात भर यहां विश्राम करके मानसिक सुख एवं शांति का अनुभव करते हुए घर वापस लौटते हैं। ----------------------------------------------- प्रतापगढ़ हब के बारे में और जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें- http://www.pratapgarhup.in प्रतापगढ़ हब फेसबुक पेज को लिखे करें- / pratapgarh.hub Twitter पर प्रतापगढ़ हब को follow करें- / pratapgarhhub Google+ पेज पर प्रतापगढ़ हब को follow करें- https://plus.google.com/+Pratapgarhhub इस वीडियो को बनाया और एडिट किया गया है ब्रेन्स नेत्र लैब में http://www.brainsnetralab.in मेरे व्यक्तिगत फेसबुक से भी जुड़ सकते हैं- / pksingh.author नए चैनल ROAD ON का लिंक नीचे है- / @prayag-hub