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@Takkarnewsmpcg:- रायगढ़ की सड़कों पर उड़ रही धूल अब सिर्फ हवा की नहीं, बल्कि 30 साल से बसे गरीब परिवारों की आंसुओं और मेहनत की है। वार्ड 47, विजयपुर में लोटस सिटी कॉलोनी के ठीक बगल निजी जमीन पर बसी 9-10 झोपड़ियों पर अचानक तहसीलदार का नोटिस थम गया—**अतिक्रमण हटाओ!** बुलडोजर की दहाड़ इन परिवारों के सपनों को कुचलने को तैयार है। ये लोग चीख-चीखकर कह रहे हैं—हम यहां *30 साल* से रह रहे हैं। पूर्व मालिक सुशील अग्रवाल ने खुद बसाया था। मजदूरी से गुजारा, बच्चे स्कूल जाते हैं, कुछ को पीएम आवास योजना का घर भी मिल चुका है। जमीन की नाप-जोख 10-12 बार हो चुकी, कभी किसी ने नहीं रोका। आज अचानक अतिक्रमणकारी घोषित कर दिया गया। घरों के सामने मिट्टी के ढेर, पानी की बौछारें—बिल्डर सुरेश और गोपाल का दबाव साफ दिख रहा है। स्थानीय पार्षद चुप्पी साधे हुए हैं। सुबह 11 बजे कोर्ट में पेशी हुई, जहां दोनों पक्षों की सुनवाई हुई। बिल्डर का दावा—जमीन हमारी है, कुछ ने गलत कब्जा किया। प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी है, कुछ लोग पैसे के लिए राजनीति कर रहे हैं। तहसीलदार ने कहा—दोनों पक्ष सुने जाएंगे, फैसला न्यायपूर्ण होगा। लेकिन सवाल वही खड़ा है—30 साल की मेहनत, बच्चों की पढ़ाई, परिवार का आशियाना... क्या सब 'अतिक्रमण' कहकर उड़ा दिया जाएगा? गरीब की झोपड़ी और अमीर की चमचमाती कॉलोनी के बीच ये टकराव रायगढ़ की इंसानियत को चुनौती दे रहा है। क्या न्याय मिलेगा या ये परिवार बेघर हो जाएंगे? फैसला जो भी आए, ये सिर्फ जमीन की लड़ाई नहीं—ये गरीब की आवाज, इंसाफ और सम्मान की जंग है। अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए... क्योंकि यहां इंसानियत दांव पर लगी है!