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#naat #islamicvideo #sufi #qawwali #natshareef #sufiqawwali नूर-ए-साबिर: इश्क़ की सदा दर-ए-साबिर की महफ़िल रौशन रूह: सूफ़ियाना समां इश्क़ में डूबा फ़क़ीर साबिर पाक का नूरानी दरबार सजदे और सदा का सफ़र “Light of Sabir: The Call of Devotion” “Echoes at the Sacred Shrine” “The Sufi’s Prayer: A Night of Qawwali” “In the Path of Divine Love” “The Radiance of Sabir Pak” “Whispers of the Eternal Light” दम-ब-दम अल्लाह, अल्लाह, दिल से पुकार उठी, इश्क़ की इस राह में हर सांस बेकरार उठी, करम की नज़र हो मौला, मेरे हाल पर एक बार, मैं आया हूँ झुकाए सर, तेरे साबिर के दरबार। साबिर, साबिर, या साबिर पाक, तेरे दर का बना हूँ मैं फ़क़ीर, साबिर, साबिर, या साबिर पाक, मेरी दुनिया, मेरी आख़िरत, तेरी तासीर। सब्र का ताज पहने जो वली, दुनिया को राह दिखाए, जो टूटे दिलों को जोड़ दे, वो नाम तेरा कहलाए, तेरी ख़ामोशियों में भी, मौला का पैग़ाम बसा, तेरे क़दमों की मिट्टी में भी जन्नत का एहसास बसा। साबिर, साबिर, या साबिर पाक, तेरे नाम से रोशन मेरी तक़दीर, साबिर, साबिर, या साबिर पाक, तेरे दर पे लुट जाए ये ज़िंदगी तफ़सीर। मैंने देखा है ग़रीबों को, तेरे दर पे मुस्कुराते, जो खाली हाथ आए थे, वो झोलियाँ भर के जाते, तेरी निगाह का सदका, मेरी तक़दीर बदल दे, मेरे अंधेरे नसीबों में भी उम्मीदों के दीप जल दे। दम-ब-दम या अल्लाह, दिल से निकले ये पुकार, साबिर पाक के सदके, कर दे मौला बेड़ा पार, हर दर्द की दवा है, तेरे दर की ये हवा, तेरे नाम की तस्बीह में ही मिलती है शिफ़ा।