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सूरदास के पद | Bihar Board Class 12 Hindi | Kavya Khand Chapter 2 | Soulful Poetry Song Welcome to GulshanBlooms 🌸 — जहाँ Hindi कविता, भक्ति, और संगीत मिलकर बनाते हैं एक soulful experience। इस वीडियो में आप सुन रहे हैं “सूरदास के पद” पर आधारित एक भावपूर्ण musical presentation, जो Bihar Board Class 12 Hindi – Kavya Khand Chapter 2 का हिस्सा है। 📖 About Surdas Ke Pad महान भक्त कवि सूरदास ने अपने पदों में भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं, माँ यशोदा का वात्सल्य, और भक्ति रस को इतनी मधुरता से व्यक्त किया है कि सदियों बाद भी ये पद सीधे हृदय को छू लेते हैं। 🎶 Why This Song Is Special • शुद्ध भक्ति भाव • Classical + Soft Music Arrangement • विद्यार्थियों और कविता प्रेमियों दोनों के लिए उपयोगी • Earphones के साथ सुनने पर और भी गहरा अनुभव यह वीडियो खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो ✨ भक्ति में सुकून ढूंढते हैं 📚 पढ़ाई के साथ कविता को महसूस करना चाहते हैं 🎧 Hindi Poetry को music के साथ enjoy करना चाहते हैं 👨🎓 For Students (Bihar Board 12th Hindi): इस गीत को सुनकर आप • कविता का भाव समझ सकते हैं • परीक्षा के लिए content याद रख सकते हैं • Kavya Khand को boring नहीं, soulful बना सकते हैं 🔔 Subscribe to GulshanBlooms अगर आपको पसंद है Hindi Poetry Songs, Bhakti Music, Lofi & Soulful Videos — तो इस चैनल को follow करना मत भूलिए। 💬 Comment करके बताइए — आपको सूरदास जी का कौन-सा पद सबसे ज्यादा पसंद है? your queries: Surdas ke pad song Bihar board class 12 hindi surdas Kavya khand chapter 2 surdas Surdas ke pad bhajan Hindi poetry song class 12 Surdas pad musical GulshanBlooms hindi song Bhakti poetry song hindi line by line hindi arth:- जागिए, ब्रजराज कुंवर, कँवल-कुसुम फूले। → हे ब्रज के राजकुमार कृष्ण! जागो, कमल के फूल खिल चुके हैं। कुमुद-चंद संकुचित भए, भृंग लता भूले। → कुमुद के फूल बंद हो गए हैं, भौंरे और लताएँ मस्ती में हैं। तमचुर खग-सोर सुहाए, बोलत बनराई। → पक्षियों की मधुर आवाज़ वन में गूँज रही है। रंभति गो खरकिन में, बछरु हिह थाई। → गायें रंभा रही हैं, बछड़े उछल-कूद कर रहे हैं। बिधु मलिन रवि प्रकास गावत नर-नारी। → चाँद फीका पड़ गया है, सूर्य का प्रकाश फैल रहा है, लोग गीत गा रहे हैं। सूर श्याम प्रात उठो, अंबुज-कर-धारी। → कवि ‘सूर’ कहते हैं—हे श्याम! कमल धारण करने वाले, अब सुबह हो गई है, उठो। 🔹 पद (2) का पंक्ति-पंक्ति अर्थ जैंवत श्याम नंद की कन्हैया। → कृष्ण नंद के घर में भोजन कर रहे हैं। कछुक खात, कछु धरनि गिरावत, छबि निरखति नंद-रनियाँ। → थोड़ा खाते हैं, थोड़ा ज़मीन पर गिरा देते हैं, यशोदा उन्हें देखती रहती हैं। बरी, बरा बेसन, बहु भाँति, व्यंजन विविध, अगनियाँ। → अनेक प्रकार के पकवान और मिठाइयाँ रखी गई हैं। डारत, खात, लेत अपने कर, रुचि मानत रघि तोरियाँ। → अपने हाथ से खाते हैं और स्वाद का आनंद लेते हैं। मिसरी, दधि, माखन मिश्रित करि, मुख नावत छबि धनियाँ। → मिश्री, दही और माखन मिलाकर खाते हैं, मुख की शोभा बढ़ जाती है। आपुन खात, नंद-मुख नावत, सो छबि कहत न बनियाँ। → कभी खुद खाते हैं, कभी माता की ओर देखते हैं—उस छवि का वर्णन असंभव है। जो रस नंद-जसोदा बिलसत, सो नहीं तिहि भुवनियाँ। → नंद-यशोदा का जो प्रेम-रस है, वैसा संसार में कहीं नहीं। भोजन करि नंद अचमन लीन्हो, मांगत सूर चुनियाँ। → भोजन के बाद कुल्ला कराया गया, और कृष्ण चुनरी माँगते हैं।