У нас вы можете посмотреть бесплатно Class10scienceआनुवंशिकताHeredity Mono and double hybrid cross एकलएवं द्विसंकरसंकरण लिंगनिर्धारणncert или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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#science #education #class10science #reetlevel2 #phenotype #genotype #cross 1. एकांगी संकरण (एकसंकर संकरण / Monohybrid Cross) जब दो शुद्ध (होमोजाइगस) जीवों के बीच केवल एक जोड़ी विपरीत लक्षणों (एक युग्म विकल्पी लक्षण) के लिए संकरण कराया जाता है, तो उसे एकांगी संकरण कहते हैं। उदाहरण (मेंडल का प्रयोग): मटर के पौधे में लंबाई का लक्षण (Tall - लंबा और Dwarf - बौना) शुद्ध लंबा पौधा (TT) × शुद्ध बौना पौधा (tt) परिणाम: F₁ पीढ़ी (प्रथम संतति पीढ़ी): सभी पौधे लंबे (Tt) होते हैं। (क्योंकि लंबा लक्षण प्रभावी/प्रबल है) F₂ पीढ़ी (स्वपरागण से): जब F₁ के पौधों (Tt × Tt) का स्वपरागण होता है, तो अनुपात मिलता है फेनोटाइप अनुपात → 3 लंबे : 1 बौना जीनोटाइप अनुपात → 1 TT : 2 Tt : 1 tt यह प्रयोग मेंडल का पृथक्करण नियम (Law of Segregation) सिद्ध करता है। 2. द्विगुण संकरण (द्विसंकर संकरण / Dihybrid Cross) जब दो शुद्ध जीवों के बीच दो जोड़ी विपरीत लक्षणों (दो युग्म विकल्पी लक्षण) के लिए संकरण कराया जाता है, तो उसे द्विगुण संकरण कहते हैं।लिंग निर्धारण वह प्रक्रिया है जिसमें संतान का लिंग (लड़का या लड़की) तय होता है। यह आनुवंशिक (genetic) आधार पर होता है और निषेचन (fertilization) के समय ही तय हो जाता है। मानव में गुणसूत्रों की संरचना मनुष्य में कुल 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं। 22 जोड़ी → ऑटोसोम (autosomes) – सामान्य गुणसूत्र, लिंग से संबंधित नहीं। 1 जोड़ी → लिंग गुणसूत्र (sex chromosomes) – ये लिंग निर्धारण करते हैं। मादा (स्त्री) में लिंग गुणसूत्र → XX (दोनों X समान आकार के) नर (पुरुष) में लिंग गुणसूत्र → XY (X बड़ा, Y छोटा) लिंग निर्धारण कैसे होता है? माँ (स्त्री) हमेशा X गुणसूत्र देती है (क्योंकि उसके पास XX हैं, इसलिए अंडाणु में केवल X जाता है)। पिता (नर) दो प्रकार के शुक्राणु बनाता है: आधे शुक्राणु में X गुणसूत्र आधे शुक्राणु में Y गुणसूत्र निषेचन के समय: यदि X शुक्राणु + X अंडाणु → XX → लड़की (मादा) यदि Y शुक्राणु + X अंडाणु → XY → लड़का (नर) इसलिए बच्चे का लिंग पिता के शुक्राणु पर निर्भर करता है। माँ हमेशा X देती है, पिता X या Y दे सकता है। अनुपात: सामान्यतः 50% लड़के और 50% लड़कियाँ (1:1 अनुपात)। उदाहरण (मेंडल का प्रसिद्ध प्रयोग): मटर के बीज में दो लक्षण: बीज का आकार → गोल (Round - R) और झुर्रीदार (Wrinkled - r) बीज का रंग → पीला (Yellow - Y) और हरा (Green - y) शुद्ध गोल-पीला (RRYY) × शुद्ध झुर्रीदार-हरा (rryy) परिणाम: F₁ पीढ़ी: सभी बीज गोल और पीले (RrYy) होते हैं। (दोनों प्रभावी लक्षण दिखते हैं) F₂ पीढ़ी (F₁ के स्वपरागण से): चार प्रकार के फेनोटाइप मिलते हैं फेनोटाइप अनुपात → 9 : 3 : 3 : 1 9 गोल-पीले 3 गोल-हरे 3 झुर्रीदार-पीले 1 झुर्रीदार-हरे यह प्रयोग मेंडल का स्वतंत्र अपव्यूहन नियम (Law of Independent Assortment) सिद्ध करता है। अर्थात् एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण से स्वतंत्र होती है।