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नमस्कार! आप सभी को गणेश चतुर्थी कि हार्दिक शुभकामनाएँ। गणेश जी की उत्पत्ति से लेकर उनके विसर्जन तक के पीछे की कथा हमारे साथ सुनें। एक बार पार्वती जी अपनी सखियों जया-विजय के साथ बातचीत कर रही थीं| तब जया ने उन्हें कहा की जिस तरह भगवान् आशुतोष के अपने कई गण हैं, ठीक वैसे ही देवी आपके भी गण होने चाहिए जो सर्वदा आपकी बात को ही सर्वोपरि मानें| जया की बात सुन कर पार्वती जी बोलीं, क्यों क्या यह नन्दी, भृंगी मेरे गण नहीं हैं? क्या इनके लिए मेरी बात सर्वोपरि नहीं है? यह बात सुन कर जया-विजया बोलीं कि हे, देवी! ये आपकी बात मानते ज़रूर हैं, लेकिन इनके लिए सर्वोपरि तो महादेव ही हैं| उस समय पार्वती जी ने उनकी बात को सुना-अनसुना कर दिया और ऐसे कुछ समय बीत गया| एक दिन पार्वती जी स्नान करने के लिए जा रही थीं तो उन्होंने नन्दी से कहा कि वे किसी को भी भीतर प्रवेश न करने दें| लेकिन कुछ ही समय बाद वहाँ महादेव आए| नन्दी ने उन्हें रोकना चाहा, पर भगवान् शिव ने यह कह कर भवन में प्रवेश किया कि उन्हें कुछ आवश्यक कार्य है| उस समय पार्वती जी को बहुत क्रोध आया कि सच में ये गण तो सिर्फ़ भगवान् शिव की ही बात को सुनते हैं| महादेव अपना कार्य कर वहाँ से चले गए| परन्तु अपने इस क्रोध में पार्वती जी ने नहाने के समय निकली अपने शरीर की मैल को इकट्ठा किया और उसे एक सुन्दर बालक का रूप दे दिया| फिर शिवा ने अपनी शक्तियों का प्रयोग कर उस बालक को प्राण भी दिए| बालक इतना सुंदर था कि उसे देखते ही पार्वती जी ने उसे अपना पुत्र स्वीकार कर लिया| बालक ने भी माता को प्रणाम किया और उनसे आज्ञा देने को कहा| माता पार्वती ने अपने पुत्र को द्वार पर ठहरने को कहा और साथ ही निर्देश दिए कि कोई भी क्यों न हो, उसे मेरी आज्ञा के बिना भवन में प्रवेश नहीं करने दिया जाए| माता की आज्ञा का पालन करते हुए बालक भवन के द्वार पर ही पहरा देने लगा| माता और उनकी सखियाँ अब इस बात से निश्चिन्त थी कि अचानक से कोई भी उनके भवन में प्रवेश नहीं कर सकेगा| कुछ समय बाद वहाँ भगवान् शिव पधारे और वे भवन में प्रवेश करने लगे| तभी द्वार पर खड़े सुन्दर बालक ने उन्हें रोका और माता पार्वती से आज्ञा मिलाने तक बहार ही रुकने को कहा| महादेव ने उस बालक को कहा कि वे माता पार्वती के पति और तीनों लोकों के स्वामी हैं, पर फिर भी बालक ने अपनी माता के आदेश को याद रखते हुए महादेव को भीतर जाने से रोके रखा| भगवान् शिव को बहुत अधिक गुस्सा आया और उन्होंने अपने गणों को वहाँ भेजा| जब गण भी बालक को हटाने में असमर्थ रहे तो गणों, देवताओं आदि सही मिल कर भगवान् शिव ने बालक के साथ युद्ध किया| जब कई प्रयास असफल रहे तो अंत में महादेव ने अपने सबसे तेज़ और शक्तिशाली त्रिशूल का प्रयोग किया| इस बार बालक इस प्रहास से अनजान था और वह स्वयं को बचा न सका| इस प्रकार शिव जी के त्रिशूल से बालक का मस्तक शरीर से अलग हो गया| अपने पुत्र की यह दशा सुन कर देवी जगदम्बा कुपित हो गईं और उन्होंने दो महाशक्तियों को उत्पन्न किया| उन्होंने पुत्र-वियोग को सहते हुए दोनों शक्तियों को पूरे संसार में प्रलय काल जैसी स्थिति उत्पन्न करने को कहा| उनका आदेश पाते ही दोनों शक्तियां मनुष्य, देवता, राक्षस शिवगण सभी का भक्षण करने लगी| चारों ओर हाहाकार मच गया| सभी को लगा जैसे प्रलयकाल का समय आ गया हो| सभी ब्रह्मा जी के पास गए, उन्होंने समाधि ली और जान लिया कि यह प्रलय नहीं, बल्कि उमा-पुत्र के मस्तक को शरीर से अलग करने के कारण हो रहा है| ऐसे में सभी देवता आदि महादेव के पास गए और उन्होंने उनसे निवेदन करने लगे कि वे जगदम्बा को ऐसा न करने के लिए समझाएं| तब सभी माँ जगदम्बा की शरण में जाने लगे, लेकिन मार्ग में ही कई देवताओं आदि को दोनों शक्तियों ने निगल लिया और बाकी भय के कारण वहाँ से लौट आए| फिर सभी ने महर्षि नारद को आगे कर माता पार्वती से क्षमा-याचना करने का निर्णय किया और श्री विष्णु, महादेव आदि देवता नारद जी के साथ माता पार्वती के भवन पहुंचे और माता से इस प्रलयकारी लीला को रोकने के लिए अनुरोध करने लगे| देवताओं की बात सुन कर माता पार्वती बोलीं कि अगर उनके पुत्र को जीवित कर दिया जाए तो और सभी उसे अपना पूजनीय मान लें तो यह संकट टाला जा सकता है| संसार को बचाने के लिए सभी ने माँ जगदम्बा के कथन को स्वीकार करने में ही अपनी भलाई समझी| तुरंत ही महादेव ने अपने गणों को एक प्राणी का मस्तक लाने के लिए कहा जो उन्हें मार्ग में सबसे पहले दिखाई दे| शिवजी की आज्ञा पा कर उनके गण उत्तर दिशा की ओर बढ़े जहां उन्हें एक दांत वाला हाथी दिखाई दिया और उन्होंने उसका मस्तक ला कर पार्वती पुत्र के शरीर पर जोड़ दिया| और फिर भगवान् शिव की कृपा से वह बालक दोबारा जीवित हो गया और फिर सभी देवी-देवताओं ने गजानन, गणेश जी को अपनी-अपनी शक्तियाँ आशीर्वाद के रूप में भेंट की| @sanatan-ki-katha #mythologystoriesinhindi #hindistories #ganesh #ganesh #ganesha #ganeshutsav #ganeshchaturthispecial #ganeshchaturthivratkatha #vrat #tyohar #tyoha #shivparvati #hindu #hinduism #hindufestival #hindumythology #vishnuji #shriharivishnu #mahabharat #mahabharata