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उत्तर दिशा की प्रचंड ठंडियों में, जहाँ घने जंगल धूप को भी अपने भीतर डूबने नहीं देते… जहाँ ऊँचे पहाड़ बादलों को छूकर खामोश खड़े रहते… और जहाँ एक शांत नदी अपनी धुन में बहती रहती—वहीं बसा था माधोपुर गाँव। दूर से देखने पर यह गाँव मिट्टी और धुएँ की बनी एक छोटी बिंदी सा लगता—पर उसके भीतर जीवन की सारी जद्दोजहद, उम्मीदें और दुख छुपे थे। इन्हीं झोपड़ियों के बीच रहता था भीमा, एक गरीब मछुआरा। उसकी झोपड़ी का छप्पर बरसात में रोता था… दीवारें थक चुकी थीं… और कोनों में जमा धूल जैसे कहती थी—“यहाँ गरीबी नहीं, संघर्ष रहता है।” भीमा का स्वभाव उसके घर जैसा नहीं था; वह शांत था… ईमानदार… साफ दिल वाला। पर नियति उसके साथ पत्थर सी कठोर ही रही। हर सुबह फटा हुआ जाल उठाकर तालाब की ओर जाता और हर शाम खाली उम्मीदों के साथ लौट आता—हमेशा केवल एक मछली उसके जीवन में उतरती थी, जैसे किस्मत ने तय कर दिया हो कि उसके हिस्से में ‘एक से ज़्यादा’ कभी नहीं होगा। गाँव वाले उसकी किस्मत का मज़ाक उड़ाते। किशोर जैसे लोगों की हँसी तालाब के पानी को भी चुभ जाती। राधा का ताना उसके सीने में और गहरा उतरता— गरीबी, जो पहले घर में थी, अब रिश्तों में भी आ गई थी। जब राधा का लालच हद पार कर गया, तो भीमा कदम बढ़ा बैठा उस जंगल की ओर— जिसकी ओर लोग नज़रें उठाकर भी नहीं देखते थे। जहाँ हवाएँ मर चुकी थीं, पेड़ सिसकते थे, और रास्ते पर पड़े सूखे पत्ते हर कदम की आहट पर काँपते थे। उसी वीरान तालाब में उसने पहली बार देखा— वह चमचमाती सुनहरी मछली। मानो पानी में डूबा सूर्य का टुकड़ा खुद उसकी ओर तैर आया हो। और फिर… एक चमत्कार—सोने का अंडा। यहीं से किस्मत ने करवट ली। हर दिन एक अंडा… हर दिन नई उम्मीद… और फिर हवेली, दौलत, सम्मान—सब मिलने लगा। पर लालच एक ऐसी आग है जो हाथों में ताकत आते ही दिल को जला देती है। राधा का मन इतना भर गया कि उसके पास जो था, वह भी कम लगने लगा— और उसी आग ने उन्हें उस पाप की ओर धकेला जिसे न इंसान देख सकता था, न समझ सकता था— तालाब को खाली करने का पाप। जब तालाब सूख गया… तब दुनिया की सारी चुप्पियाँ एक साथ डर बनकर उठीं। काली सुरंग, काला धुआँ, काँपती धरती— जंगली सन्नाटा जैसे गूंज उठा— “लालच का फल हमेशा विनाश है।” धन गया… हवेली गई… और अंत में राधा की सेहत भी चली गई। पर मनुष्य जब सच में टूटता है तभी सच्चाई की रोशनी उसके भीतर जलती है। और जब वे पश्चाताप लेकर तालाब पहुँचे— प्रकृति ने उन्हें फिर एक मौका दिया। पानी फिर से भरा, पेड़ों ने साँस ली, हवा ने अपनी धुन लौटाई— और तालाब की रानी मछली ने उन्हें क्षमा करते हुए एक आखिरी सोने का अंडा दिया। न लालच… न अभिमान… सिर्फ सीख। और सीख से शुरू हुआ उनका नया जीवन। धीरे-धीरे व्यापार बढ़ा, सम्मान बढ़ा— पर उनके भीतर स्थिर हो गई एक बात— Disclaimer This video is made for educational and entertainment purposes only. Our intention is not to harm any animal, plant, or living being in any way. All content shown is safe and respectful. This video is intended for viewers 14 years of age and above. Machhuare ka bhagy Machhli wale ka bhagy Machhuare मछुआरे jadui kahani vichitra kahani naseeb apna apna karmo ka fal raja rani ki kahani hindi kahani raja maharaja ki new hindi kahani Neki ka badla Karmo ka phal नेकी का बदला जैसी करनी वैसी भरनी हिंदी कहानी jesi karni wesi bharni hindi kahani Thand ka kaher ठंड का कहर kismat ka khel hindi kahani नसीब का खेल Hindi kahani Ek gaon ki kahani Garmi ka kahar Hindi kahani Gareeb ki garmi hindi kahani Mehnat aur Bhagya Hindi kahani Museebat bhara jeevan Gareeb ka sapna Garib ka sapna Kisan ki majburi RELATED VIDEOS vichitra toons hindi Dream toon kahani Ready Cartoon Tv Chatpati kahaniya Mehnat aur bhagya Dream toons comedy Koo koo tv mehnat aur bhagya Ssoftoons kahaniya Koo koo tv Mehnat aur Bhagya dreamtoon kahani Garib ki mehnat aur Bhagya Dream Toon Hindi Kahaniya TV jaisi karni waisi bharni ChatPati Kahaniya Kashipur gaon ki kahani Mehnat aur Bhagya Hindi ,