У нас вы можете посмотреть бесплатно लांछन-मुंशी प्रेमचंद की कहानी | A story by Munshi Premchand или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
मुंशी प्रेमचंद की कहानी लांछन समाज की उस सोच को सामने लाती है जहाँ शक, सच से बड़ा बन जाता है। यह कहानी एक ऐसे इल्ज़ाम की है जो साबित कभी नहीं हुआ, लेकिन जिसने एक इंसान की इज़्ज़त और पहचान छीन ली। #story #stories #kahani #kahaniya #premchand #historical मुंशी प्रेमचंद (1880–1936) हिंदी और उर्दू साहित्य के यथार्थवादी युग के सबसे बड़े स्तंभ माने जाते हैं। उनका वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन अपनी लेखनी के कारण वे ‘प्रेमचंद’ के नाम से साहित्य-जगत में अमर हो गए। 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के पास लमही गाँव में जन्मे प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज की कड़वी सच्चाइयों, नैतिक संघर्षों और मानवीय कमजोरियों को गहराई से उजागर किया। उनकी प्रमुख रचनाएँ — गोदान, गबन, निर्मला, सेवासदन, रंगभूमि और कफन — आज भी समाज का दर्पण मानी जाती हैं। प्रेमचंद का साहित्य विशेष रूप से गरीब, शोषित और नैतिक दुविधाओं से जूझते इंसान की आवाज़ बनकर उभरा। उन्होंने अपने लेखन में सामाजिक न्याय, आत्मसंघर्ष और मानवीय मूल्यों को केंद्रीय स्थान दिया। उनकी भाषा सरल, शैली प्रभावशाली और दृष्टिकोण पूर्णतः यथार्थवादी था। प्रेमचंद ने हिंदी साहित्य को न केवल नई दिशा दी, बल्कि उसे आम जनमानस से गहराई से जोड़ा। 8 अक्टूबर 1936 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक, प्रभावशाली और विचारोत्तेजक है।