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शिवलिंग को लेकर अक्सर समाज में कई भ्रांतियां रही हैं, लेकिन यदि हम प्राचीन संस्कृत ग्रंथों और आधुनिक विज्ञान (Modern Science) के नजरिए से देखें, तो शिवलिंग ब्रह्मांड की अनंत ऊर्जा और पदार्थ (Matter) का एक अद्भुत प्रतीक है। यहाँ शिवलिंग के पीछे छिपे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्यों का विश्लेषण दिया गया है: 1. ऊर्जा का पुंज (Powerhouse of Energy) 'शिव' का अर्थ है 'कल्याणकारी' और 'लिंग' का अर्थ है 'प्रतीक' या 'चिह्न'। वैज्ञानिक दृष्टि से शिवलिंग 'Cosmic Energy' (ब्रह्मांडीय ऊर्जा) के स्रोत को दर्शाता है। परमाणु संरचना: यदि आप एक परमाणु (Atom) की संरचना को देखें, तो उसमें प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन होते हैं। शिवलिंग की आकृति ब्रह्मांड के उसी सूक्ष्म और विशाल स्वरूप को दर्शाती है जहाँ ऊर्जा का निरंतर प्रवाह होता है। 2. रेडियोधर्मिता और शिवलिंग (Radioactivity) भारत के अधिकांश प्राचीन और प्रमुख शिवलिंग उन स्थानों पर स्थित हैं जहाँ पृथ्वी की चुंबकीय शक्ति (Magnetic Power) सबसे अधिक है। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC): कई शोधकर्ताओं का मानना है कि आधुनिक न्यूक्लियर रिएक्टर (Nuclear Reactor) का आकार और शिवलिंग का आकार काफी हद तक समान है। जल चढ़ाने का कारण: जैसे न्यूक्लियर रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए भारी पानी (Heavy Water) का उपयोग किया जाता है, वैसे ही शिवलिंग पर निरंतर जल की धारा (जलाभिषेक) प्रवाहित की जाती है ताकि उसकी तीव्र ऊर्जा को शांत और नियंत्रित रखा जा सके। 3. खगोलीय प्रतीक (Astronomical Symbol) शिवलिंग केवल पत्थर की मूर्ति नहीं है, बल्कि यह आकाशगंगा (Galaxy) और सौरमंडल का प्रतिनिधित्व करता है। शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा (लिंगम) 'आकाश' और निचला हिस्सा (योनि/पीठम) 'पृथ्वी' का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि ऊर्जा और पदार्थ के मिलन से ही सृष्टि का निर्माण संभव है। 4. पदार्थ की तीन अवस्थाएँ शिवलिंग के तीन हिस्से होते हैं, जो विज्ञान के 'Entropy' और 'Creation' के सिद्धांत से मेल खाते हैं: ब्रह्मा भाग (नीचे का हिस्सा): जो सृजन (Creation) का प्रतीक है। विष्णु भाग (मध्य का हिस्सा): जो स्थिति (Preservation) का प्रतीक है। रुद्र भाग (ऊपरी हिस्सा): जो परिवर्तन और विनाश (Transformation) का प्रतीक है। शिवलिंग के अंगों का वैज्ञानिक विभाजन भाग देव वैज्ञानिक गुण निचला आधार ब्रह्मा गुरुत्वाकर्षण (Gravity) और आधार मध्य भाग विष्णु चुंबकीय क्षेत्र (Magnetism) ऊपरी स्तंभ शिव शुद्ध ऊर्जा (Pure Energy) 5. शून्य और अनंत (Zero and Infinity) गणितीय रूप से, शिवलिंग एक अंडाकार (Ellipsoid) आकृति है। विज्ञान मानता है कि ब्रह्मांड का विस्तार एक अंडे की आकृति (Cosmic Egg या ब्रह्मांडीय अंडा) में हुआ था। शिवलिंग इसी 'शून्य' से शुरू होकर 'अनंत' तक फैली हुई ऊर्जा का प्रतीक है। निष्कर्ष शिवलिंग को केवल एक धार्मिक वस्तु मानना अधूरा सत्य है। यह प्राचीन ऋषियों द्वारा दिया गया वह ज्ञान है जिसे आज का विज्ञान 'Energy-Matter Interaction' कहता है। यह एक ऐसा माध्यम है जो मानव शरीर की ऊर्जा को ब्रह्मांड की उच्च ऊर्जा से जोड़ने में मदद करता है।