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अमेरिका की राजनीति और वैश्विक सैन्य संतुलन को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा सामने आया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि 3 जनवरी को दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela में हुए एक गुप्त सैन्य ऑपरेशन के दौरान अमेरिका ने एक अत्याधुनिक “सीक्रेट हथियार” का इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से विरोधी पक्ष के रक्षा सिस्टम पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और सैनिकों को गोली चलाने का मौका तक नहीं मिला। यह बयान उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना स्थित Fort Bragg में सैनिकों को संबोधित करते हुए दिया, जहां उन्होंने इस रहस्यमयी तकनीक को “डिसकम्बोबुलेटर” नाम से पुकारा। हालांकि उन्होंने इसकी कार्यप्रणाली या तकनीकी विवरण साझा करने से इनकार करते हुए कहा कि अभी वह इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकते, लेकिन भविष्य में दुनिया इसके बारे में जानेगी। ट्रम्प के अनुसार ऑपरेशन के दौरान रूसी और चीनी मूल के डिफेंस उपकरण काम नहीं कर पाए, जिससे विरोधी पक्ष पूरी तरह भ्रमित हो गया। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है क्योंकि यदि किसी देश के एयर डिफेंस, रडार और कम्युनिकेशन सिस्टम एक साथ बंद हो जाएं तो इसके पीछे उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर अटैक या हाई-फ्रीक्वेंसी एनर्जी टेक्नोलॉजी जैसी तकनीक हो सकती है। कई रक्षा विशेषज्ञ इसे भविष्य के युद्ध की झलक बता रहे हैं, जबकि कुछ विश्लेषक इसे राजनीतिक बयानबाज़ी मान रहे हैं क्योंकि अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है। यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि Russia और China पहले ही हाइपरसोनिक मिसाइल, साइबर वॉरफेयर और स्पेस डिफेंस सिस्टम के विकास में अमेरिका के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। अगर ऐसा हथियार वास्तव में मौजूद है जो बिना गोली चलाए दुश्मन की सैन्य क्षमता को निष्क्रिय कर सकता है, तो यह आधुनिक युद्ध की परिभाषा बदल सकता है और वैश्विक हथियारों की होड़ को और तेज कर सकता है। फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवाल बाकी हैं — क्या यह वास्तविक सैन्य तकनीक है या रणनीतिक संदेश? क्या सच में विदेशी रक्षा प्रणालियां फेल हुईं या यह मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश है? जब तक स्वतंत्र जांच या आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आते, तब तक इस दावे को सावधानी से देखना जरूरी है।