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Join this channel to get access to perks: / @kavitarkvyaspalji1334 ॥ श्रीनीलकंठ अघोरास्त्र स्तोत्रम्॥ ॐ नमो नीलकण्ठाय, श्वेत-शरीराय, सर्पालंकार भूषिताय, भुजंग परिकराय, नागयज्ञोपवीताय, अनेक मृत्यु विनाशाय नमः। युग युगान्त काल प्रलय-प्रचंडाय, प्रज्वाल-मुखाय नमः। दंष्ट्राकराल घोर रूपाय हूं हूं फट् स्वाहा। ज्वालामुखाय, मंत्र करालाय,प्रचण्डार्क सहस्त्रांशु चण्डाय नमः। कर्पूर मोद परिमलांगाय नमः। ॐ ईं ई नील महानील वज्र वैलक्ष्य मणि माणिक्य मुकुट भूषणाय हन हन हन दहन दहनाय ह्रीं स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर घोर घोर तनुरूप चट चट प्रचट प्रचट कह कह वम वम बंध बंध घातय घातय हुं फट् । ॐ ह्रां ॐ ह्रीं ॐ ह्रीं स्फुर अघोर रूपाय रथ रथ तंत्र तंत्र चट् चट् कह कह मद मद दहन दाहनाय ह्रीं स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर घोर घोर तनुरूप चट चट प्रचट प्रचट कह कह वम वम बंध बंध घातय घातय हुं फट् जरा मरण भय हूं हूं फट् स्वाहा। अनन्ताघोर ज्वर मरण भय क्षय कुष्ठ व्याधि विनाशाय, शाकिनी डाकिनी ब्रह्मराक्षस दैत्य दानव बन्धनाय, अपस्मार भूत बैताल डाकिनी शाकिनी सर्व ग्रह विनाशाय, मंत्र कोटि प्रकटाय पर विद्योच्छेदनाय, हूं हूं फट् स्वाहा। आत्म मंत्र सरंक्षणाय नमः। ॐ ह्रां ह्रीं हौं नमो भूत डामरी ज्वाल वश भूतानां द्वादश भूतानां त्रयोदश षोडश प्रेतानां पंच दश डाकिनी शाकिनीनां हन हन। दहन दारनाथ! एकाहिक द्वयाहिक त्र्याहिक चातुर्थिक पंचाहिक व्याघ पादान्त वातादि वात सरिक कफ पित्तक काश श्वास श्लेष्मादिकं दह दह छिन्धि छिन्धि श्रीमहादेव निर्मित स्तभन मोहन वश्याकर्षणोच्चाटन कीलना द्वेषण इति षट् कर्माणि वृत्य हूं हूं फट् स्वाहा। वात-ज्वर मरण-भय छिन्न छिन्न नेह नेह भूतज्वर प्रेतज्वर पिशाचज्वर रात्रिज्वर शीतज्वर तापज्वर बालज्वर कुमारज्वर अमितज्वर दहनज्वर ब्रह्मज्वर विष्णुज्वर रूद्रज्वर मारीज्वर प्रवेशज्चर कामादि विषमज्वर मारी ज्वर प्रचण्ड घराय प्रमथेश्वर ! शीघ्रं हूं हूं फट् स्वाहा। ॐ नमो नीलकण्ठाय, दक्षज्वर ध्वंसनाय श्री नीलकण्ठाय नमः। ॥ फलश्रुतिः ॥ सप्तवारं पठेत्स्तोत्रं मनसा चिन्तितं जपेत्। तत्सर्वं सफलं प्राप्तं शिवलोकं स गच्छति॥ ॥ इति श्रीनीलकण्ठ अघोरास्त्र सम्पूर्णं॥