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Sant Tulsidas Bhajan -केशव , कहि न जाइ, का कहिये।देखत तव रचना विचित्र अति ,समुझि मनहिमन रहिये। शून्य भीति पर चित्र, रंग नहि तनु बिनु लिखा चितेरे। धोये मिटे न मरै भीति, दु:ख पाइय इति तनु हेरे। रविकर नीर बसै अति दारुन, मकर रुप तेहि माहीं। बदन हीन सो ग्रसै चराचर, पान करन जे जाहीं। कोउ कह सत्य, झूठ कहे कोउ जुगल प्रबल कोउ मानै। तुलसीदास परिहरै तीनि भ्रम, सो आपुन पहिचानै। संत तुलसीदास Sanr Kabir Bhajan धुन सुन के मनवा मगन हुवा जी, धुन सुन के मनवा मगन हुवा जी | लागी समाधी गुरू चरणा जी, अंत सखा दुःख दूर हुवा जी ||धृ॥ सार शब्द एक डोरी लागी, ते चढ़ हंसा पार हुवा जी | शून्य शिखर पर झालर झलके, बरसत अमृत प्रेम चुवा जी | कहे कबीरा सुनो भाई साधो,चाख चाख अलमस्त हुवा जी | रचना संत कबीर Vocal: Legend – पं.मुकूल शिवपुत्र निर्गुनी भजन Pune Concert 2017 Shared in the interest of spreading beautiful classical music of India to get divine pleasure.This video is not for any commercial purpose.