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शब्दवीणा परिवार ने प्रथम पुण्यतिथि पर स्वर्गीय कन्हैयालाल मेहरवार को अर्पित की काव्यमय श्रद्धांजलि -शब्दवीणा की कर्नाटक प्रदेश समिति के संयोजन में आयोजित हुआ कार्यक्रम -जाओ युग के हे दधीचि तुम, तेरी आज विदाई है *-जिनगी के झोल-झमेला के, सब रंग बड़ी अलबेला हे। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था शब्दवीणा की कर्नाटक प्रदेश समिति के संयोजन में आयोजित मासिक प्रादेशिक काव्यगोष्ठी में शब्दवीणा के प्रथम राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष व हिन्दी और मगही के प्रख्यात कवि स्वर्गीय कन्हैयालाल मेहरवार को उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर शब्दवीणा परिवार की ओर से काव्यांजलि एवं मौन सभा द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी। कार्यक्रम अध्यक्ष एवं जहानाबाद जिला संरक्षक वरिष्ठ कवि दीपक कुमार, शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो डॉ रश्मि प्रियदर्शनी, कार्यक्रम के संचालक कर्नाटक प्रदेश उपाध्यक्ष विजयेन्द्र सैनी, पश्चिम बंगाल प्रदेश संरक्षक सह राष्ट्रीय परामर्शदाता पुरुषोत्तम तिवारी, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आशा दिनकर, मध्य प्रदेश सचिव अरुण अपेक्षित, हरियाणा प्रदेश सचिव सरोज कुमार, मधु वशिष्ठ, उत्तराखंड प्रदेश साहित्य मंत्री आशा साहनी, उत्तर प्रदेश प्रचार मंत्री अनुराग दीक्षित, मथुरा जिला अध्यक्ष रामदेव शर्मा राही, कणिका वर्मा, कर्मवीर सिंह, रवीन्द्र सिंह, कर्नाटक प्रदेश साहित्य मंत्री निगम राज़, सुशील कुमार, गया जिला अध्यक्ष जैनेन्द्र कुमार मालवीय एवं अरविंद कुमार आदि ने भाव, विचार, आध्यात्मिकता में डूबे गीत, ग़ज़ल, दोहे, भजन एवं मुक्तकों की सुमधुर प्रस्तुति देते हुए कवि स्व. कन्हैयालाल मेहरवार के प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित की। शांति पाठ द्वारा उनकी आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की। शब्दवीणा काव्यगोष्ठी में दीपक कुमार ने श्री मेहरवार के मगही गीतों को याद करते हुए मगही में रचित गीत "जिनगी के झोल-झमेला के, सब रंग बड़ी अलबेला हे। जे झूठा लगे ओही सच्चा है, जे साँच लगे, सब खेला हे" सुनाया। जैनेन्द्र कुमार मालवीय द्वारा प्रस्तुत विदाई गीत "हे मानस के राजहंस तुम, क्यूं कर प्रीत लगाई है। जाओ युग के हे दधीचि तुम, तेरी आज विदाई है" सुन सभी भावविभोर हो उठे। सरोज कुमार ने "मेरी मैया की महिमा है अपार। नमन करती हूँ मैं बारंबार", अरुण अपेक्षित ने "कितने अधूरे हैं सपने। कितनी मधुर कामनाएँ। इच्छाएँ अतृप्त कितनी, रह रह के अंतर दुखायें।। मंदिर में दीपक जलायें। माँ हम तुझे ही मनायें" तथा अरविंद कुमार ने "माँ तेरे प्यार को मैंने जिया है। तेरे संघर्षों को महसूस किया है" रचना द्वारा माँ के प्रति अपने भाव प्रकट किये। राम देव शर्मा राही के शेर "ख्याल उल्फत आतिशे गम में सुलगते रह गये। मैं किसी को याद कर इनको हवा देता रहा", आशा दिनकर के गीत "चलो दो कदम जो संग तुम हमारे। दीये जल उठेंगे उन राहों में सारे" तथा कर्मवीर सिंह की रचना "ऐरी मोरी मइया, छोटी सी रजइया, मंगवा दे इस बार, मुझको ठंढ लग रही" पर खूब वाहवाहियाँ लगीं। निगम राज़ की "जिंदगी में हमें लोग अच्छे मिले।हम थे सच्चे, तो सारे ही सच्चे मिले", कणिका वर्मा की "मैं हूँ गृहिणी, मैं घर की ऋणी, या घर मेरा ऋणी?", आशा साहनी की "प्रेम की बांसुरी बन बजो साधिका। मैंने गीतों में तुमको गज़ल कह दिया" तथा मधु वशिष्ठ की "ना कुछ लेकर आये, ना कुछ लेकर जाना है। जीत को सिर पर, हार को दिल पर नहीं चढ़ाना है।" को श्रोताओं से बहुत सराहना मिली। अनुराग दीक्षित ने नववर्ष पर "आओ विगत वर्ष का, यारों देखे लेखा जोखा। किसने किया सुगम जीवन पथ, किससे पाया धोखा" रचना सुना कर प्रशंसा पायी। विजयेंद्र सैनी ने कौरवी बोली में "खेतों में न जी लगता" लोकगीत सुना कर सभी का मन मोह लिया। एयरफोर्स में अधिकारी रहे सुशील कुमार ने "पीठ पर जो वार किया तो फिर जीता तो क्या जीता। छिप कर जो प्रहार किया तो फिर जीता तो क्या जीता" पंक्तियों द्वारा अपनी देशभक्ति को अभिव्यक्ति दी। शब्दवीणा के राष्ट्रीय परामर्शदाता श्रीराम कथावाचक पुरुषोत्तम तिवारी ने काव्यगोष्ठी में प्रस्तुत सभी रचनाओं को सुंदर भावों और विचारों से परिपूर्ण बताते हुए कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष सुनीता सैनी, उपाध्यक्ष विजयेंद्र सैनी सहित सभी संयोजकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हृदय है तो भाव है, भाव है तो कविता है, और जिनमें संवेदनशीलता है वे कवि हैं। रवीन्द्र सिंह ने श्रीमद्भगवद्गीता को आधार बनाकर लिखी अपनी रचना को एआई की मदद से सस्वर प्रस्तुत किया। डॉ रश्मि ने कवि कन्हैयालाल मेहरवार की स्मृतियों को नमन करते हुए "अँखियों में बस जाओ ऐसे, इस दुनिया को जाऊं भूल। हृदय मध्य धंस जाओ ऐसे, जैसे शिव का दिव्य त्रिशूल" ईश भजन को सुंदर स्वर में गाकर काव्यगोष्ठी को भक्तिभाव से ओतप्रोत कर डाला। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से किया गया, जिससे देश के विभिन्न भागों से जुड़े साहित्यानुरागियों ने काव्यपाठ का आनंद उठाया।