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॥ श्री शिव तांडव स्तोत्र ॥ गायक एवं संगीतकार: रवीन्द्र जैन मूल रचनाकार: रावण (संस्कृत) शैली: शिव तांडव स्तोत्र | भक्ति संगीत | महादेव भजन ▫️ भावार्थ: यह स्तोत्र भगवान शिव के सर्वशक्तिमान एवं प्रलयकारी तांडव नृत्य का वर्णन करता है। रवीन्द्र जैन जी की अमर आवाज़ में यह स्तोत्र अत्यंत प्रभावशाली एवं कंपनपूर्ण है। ▫️ पवित्र पंक्तियाँ: जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽव लम्ब्य लम्बितां भुजंग तुंग मालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन् निनाद वड्डमर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥ जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽव लम्ब्य लम्बितां भुजंग तुंग मालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन् निनाद वड्डमर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥1॥ जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिम्पनिर्झरी, विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि। धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके, किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममः ॥2॥ धराधरेन्द्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर, स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे। कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि, क्वचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥ ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुलिंगभा, निपीतपंचसायकं नमन्निलिंपायकम्। सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं, महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥4॥ करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वलद्धनंजयाहुतीकृतप्रचंडपंचसायके। धराधरेंद्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रकप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचने रतिर्ममः ॥5॥ नवीन मेघ मंडली निरुद्ध दुर्धरस्फुरत्कुहू निशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकज्जलम्। अन्धः तमः निरुन्धनि क्रियेशि धनि सुन्धमम् शिवेति मन्त्रभूषिगः क्रियेशियाम् नमः ॥6॥ (विशेष) स्फुरद्गलन्नदीविषण्णिविष्णुन्निग्रहस्थिर, मुखरालयानिलब्धबद्धकज्जलम्। अन्धः तमः निरुन्धनि क्रियेशि धनि सुन्धमम्, शिवेति मन्त्रभूषिगः क्रियेशियाम् नमः ॥7॥ (विशेष) अचल निष्कलं अक्षरं अमोक्षरूपम्, अनेक अव्ययं अव्ययम् अनेकरूपम्। अनंत अंतकम् अव्ययं अनेकरूपम्, शिवं शिवं शिवं शिवं शिवं शिवम् नता: ॥8॥ (स 🎧 सुनें और अनुभव करें शिव तांडव का दिव्य रस। 🔔 Subscribe: [आपका चैनल लिंक] 📲 Share: हर हर महादेव बोलिए! — ✅ वीडियो में शामिल: 0:00 – परिचय / मंगलाचरण 0:15 – शिव तांडव स्तोत्र आरंभ 6:30 – समाप्ति एवं आशीर्वाद — 🙏 अन्य भजन सुनें: ▶️ ॐ नमः शिवाय – [लिंक] ▶️ शिव अमरनाथ अमृतवाणी – [लिंक] —@BiplabRam2 #ShivTandav #RavindraJain #Mahadev #HarHarMahadev #ShivratriSpecial #ShivBhajan #ShivTandavStotram