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बाबल मारे ढूंढ लेयर आज्यो जी बाबल मारे ढूंढ लेयर आज्यो जी मायड़ मारी ढूंढ खंदाज्यो जी काकाजी मारे ढूंढ लेयर आज्यो जी काकाजी मारे ढूंढ लेयर आज्यो जी काकीसा मारी ढूंढ खंदाज्यो जी ओए मारा सुसरा जी बोले ये बोल ओए मारा सासू जी बोले ये बोल बवू ये थारे ढूंढ कुण ल्यासी ए ओए मारा जेठजी बोले कड़वा बोल ओए मारी जिठ्यांणी बोले ए कड़वा बोल बवू ये थारे ढूंढ कुण ल्यासी ए बवूये थारा बूढ़ा ये मायर बाप बवूये थारा बूढ़ा छे मायर बाप बीर थारो टाबर रैग्यो ए बवूये थारा बूढ़ा घणा मायर बाप बवूये थारा बूढ़ा बूढ़ा मायर बाप पीर थारो दूरो ई रैग्यो ए बाई ए थारे ढूंढ खंदास्यां ये बेटी ए थारे ढूंढ खंदास्यां ये हालरिया थाने ढूंढ ढूंढास्यां ए ओये थे तो पूजो ये होली ढूंढ ओये थे तो पूजो ये होली ढूंढ आंगणियां में फूल्या बखेरो ए बाई ए थारे चूंदड़ी खंदास्यां ये बेटी ए थारे चूंदड़ी खंदास्यां ये बाई ए थारे झूमरियां खंदास्यां ए ओये मारा दोयतड़ा रा धोला धोला झगल्या ओये मारा दोयतड़ा रा धोला धोला झगल्या ढूंढ थे तो होली को पुजावो ए ओये मारा दोयतड़ा रा कुड़ता र टोपी ओये मारा दोयतड़ा रा कुड़ता र टोपी ढूंढ थे तो ग्यारस को पुजावो ए बाई ए थारे पायल खंदावा ए बेटी ए थारे पायल खंदावा ए बाई ए थारे रखड़ी खंदावा ए ओये मारा दोयतड़ा रा ख्याल खिलोणा ओये मारा दोयतड़ा रा ख्याल खिलोणा ढूंढ थे तो गीगा ने पुजावो ए ओये मारा दोयतड़ा रा फूल्या र पतासा ओये मारा दोयतड़ा रा फूल्या र पतासा ढूंढ थे तो होलर ने पुजावो ए राजस्थान की समृद्ध परंपराओं में से एक मार्मिक अद्भुत व अनूठी संस्कृति ढूंढ है, जो होली के अवसर पर नवजात शिशुओं के जन्म की खुशी में मनाई जाती है इस राजस्थानी संस्कृति में पीहर पक्ष (माता का मायका) जच्चे और होलर के लिए ढेरों उपहार वस्त्र गहने मिठाइयाँ लेकर आता है परिवार के सभी सदस्य एवं रिश्तेदार बच्चों के जन्म पर बहुत खुश होते हैं परिवार के साथ उल्लास पूर्वक इस अवसर को मनाते हैं बाबल मारे ढूंढ लेयर आज्यो जी के माध्यम से इस संस्कृति की सुंदरता और भावनात्मक पहलुओं को जीवंत किया है गीत के बोल परिवारजनों के भावों को दर्शाते हैं जहाँ माता-पिता, काका-काकी, सास-ससुर आदि नवजात के लिए अपनी अपूर्व वात्सल्य स्नेह शुभकामनाएँ और प्रेम प्रकट करते हैं जांगिड़ लोक गीत रामविलास जांगिड़ अजमेर द्वारा स्थापित राजस्थानी लोक गीत रस धारा प्लेटफॉर्म का उद्देश्य महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले बहुत पुराने राजस्थानी लोक गीतों की समृद्ध परंपरा को संरक्षित विकसित और पल्लवित करना है इस मंच पर राजस्थानी लोक गीत भाषा और संस्कृति के अनमोल रत्नों को प्रदर्शित किया जाता है ताकि युवा पीढ़ी इनसे जुड़ सके और लोक गीतों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को समझते हुए इसे संरक्षित कर सके यह प्लेटफार्म राजस्थान के ग्रामीण जीवन लोक संगीत और पारंपरिक गीतों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है जो लोक कला के प्रति समझ और सम्मान बढ़ाने में बड़ा सहायक है इंदिरा जांगिड़ (9413 601939) प्रबंधक जांगिड़ लोक रस धारा 18 उत्तम नगर घूघरा अजमेर (राजस्थान) 305023