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#law #vlog #lawyer #legaladvice #legaleducation जब भी किसी #सड़क_दुर्घटना में दुर्भाग्यवश मृत्यु होती है, तो FIR दर्ज होते ही चालक की गिरफ्तारी और उसके बाद शीघ्र जमानत मिल जाने पर सोशल मीडिया पर अक्सर न्यायपालिका और सिस्टम पर आरोप लगाने लगते हैं। परंतु वास्तविकता को कानून की दृष्टि से समझना आवश्यक है। सबसे पहले यह समझना चाहिए कि FIR में दर्ज धाराएं ही आगे की प्रक्रिया की दिशा काफी हद तक तय कर देती हैं। अधिकांश सड़क दुर्घटना मृत्यु मामलों में FIR सामान्यत: लापरवाही आधारित धाराओं में दर्ज होती है, जैसे: IPC 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) / BNS धारा 281 IPC 304A (लापरवाही से मृत्यु कारित करना) / BNS धारा 106(1) IPC 337 / 338 (चोट / गंभीर चोट) / BNS धारा 125(a), 125(b) इन अपराधों में #हत्या_का_इरादा_नहीं माना जाता। 304A एक Negligence आधारित अपराध है, जिसमें Mens Rea अर्थात दोषपूर्ण आपराधिक मानसिकता का तत्व नहीं होता। व्यवहार में ये #जमानत_के_अनुकूल श्रेणी में आते हैं, इसलिए न्यायालय का दृष्टिकोण उतना कठोर नहीं होता जैसा हत्या या Culpable Homicide जैसे मामलों में होता है। इन धाराओं में जमानत जल्दी होने के मुख्य कारण हैं: • अधिकतम सजा अपेक्षाकृत कम होना (304A में अधिकतम 2 वर्ष तक) • लंबी न्यायिक हिरासत का औचित्य कम माना जाना • जांच में हिरासत की सीमित आवश्यकता (मौके से साक्ष्य उपलब्ध) • आरोपी के भागने या साक्ष्य से छेड़छाड़ का जोखिम कम होना (यदि वह स्थानीय और सहयोगी हो) इसके साथ ही आपराधिक न्यायशास्त्र का एक मूल सिद्धांत है: “Bail is the rule, jail is the exception” विशेषकर तब जब अपराध गैर-इरादतन हो और जांच में निरंतर हिरासत आवश्यक न हो। लेकिन स्थिति पूरी तरह बदल जाती है यदि FIR में यह आरोप दर्ज हो कि "अभियुक्त ने जान से मारने के उद्देश्य से जानबूझकर वाहन से टक्कर मारी और पूर्व में भी ऐसा प्रयास किया था" .ऐसी दशा में मामला लापरवाही का नहीं रह जाता और हत्या (302), Culpable Homicide (304) या BNS के समकक्ष गंभीर प्रावधान लागू हो सकते हैं। यहां Mens Rea स्पष्ट रूप से आरोपित होती है और जमानत का दृष्टिकोण कठोर हो जाता है। प्रारंभिक स्तर पर तत्काल जमानत मिलना अत्यंत कठिन माना जाता है। व्यवहारिक स्तर पर समझें: • थाने स्तर पर जमानत लगभग #असंभव • मजिस्ट्रेट स्तर पर सामान्यत: #अस्वीकृत • सेशन कोर्ट तथ्यों पर निर्भर • उच्च न्यायालय में ही मजबूत आधार पर संभावना बनती है इस पूरी चर्चा का सार यही है कि सड़क दुर्घटना मामलों में तुरंत जमानत का मूल कारण प्रायः FIR में आरोपों की प्रकृति होती है, न कि न्यायपालिका या सिस्टम की कोई कथित कमजोरी। आरोप लगाना आसान है, परंतु न्यायालय के समक्ष तथ्यों और कानून की कसौटी पर ही सब कुछ परखा जाता है। — सुनील कुमार शर्मा अधिवक्ता, उच्च न्यायालय नोट - यह विवरण हमारे लीगल ब्लॉग का ब्रीफ है लीगल ब्लॉग में रोड एक्सीडेंट से संबंधित केस लॉ व ट्रायल से संबंधित जानकारियां दी गई हैं.