У нас вы можете посмотреть бесплатно सखि, वे मुझसे कहकर जाते I यशोधरा की विरह-वेदना और स्वाभिमान | मैथिलीशरण गुप्त или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित अमर काव्य ‘यशोधरा’ का यह मार्मिक अंश भारतीय नारी के स्वाभिमान, त्याग और विरह की अद्भुत अभिव्यक्ति है। “सखि, वे मुझसे कहकर जाते…” में यशोधरा अपने मन का द्वंद्व प्रकट करती हैं—उन्हें सिद्धार्थ के जाने का दुख कम है, पर बिना बताए चले जाने का मलाल अधिक। यह कविता दर्शाती है कि भारतीय नारी केवल करुणा का प्रतीक नहीं, बल्कि गौरव, धैर्य और शक्ति का स्वरूप भी है। यदि वे बताते, तो क्या यशोधरा उनके मार्ग में बाधा बनती? एक क्षत्राणी पत्नी तो अपने प्रिय को धर्म और लोककल्याण के लिए हँसते-हँसते विदा कर देती है। इस प्रस्तुति में यशोधरा के मौन प्रेम, पीड़ा और गर्व को भावपूर्ण स्वर व दृश्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। 🎧 Voice: Ambika Sambyal 📜 Poet: Maithili Sharan Gupt अगर आपको हिंदी साहित्य और भावपूर्ण काव्य पसंद है, तो वीडियो को Like, Share और Subscribe अवश्य करें। #hindipoetry #indianpoetry #maithilisharangupt #maithili #yashodhara #sakhivemujhsekehkejaate #hindikavita #indianliterature #hindiliterature #poetryrecitation #classicalpoetry #separation #hindi #ugc #ugchindi #ugcnetexam #ugcnet #womendayspecial #womenday #women #indianwomen #feminism