У нас вы можете посмотреть бесплатно महाशिवरात्रि: बनारस के स्वयम्भू शिंवलिंग की रहस्यमयी, अनसुनी और गुप्त कथाएं | Tilak Patrika 🙏 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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"वाराणसी (काशी) जहां शिवलिंगों की स्थापना का श्रेय देवी-देवताओं, किन्नरों, दैत्यों, राक्षसों, अप्सराओं, ऋषियों, सन्त-महात्माओं और यति सन्यासियों को जाता है। काशी में लगभग 21000 से भी अधिक शिव मंदिर हैं, जिसमें 1100 करीब स्वयम्भू शिवलिंग हैं। देवों के देव महादेव के शिवलिंग की कथाएं रहस्य से भरी हुई हैं। महाशिवरात्रि के महापर्व पर आज तिलक पत्रिका के इस वीडियो में हम आपको वाराणसी के ऐसे ही चुनिंदा शिवलिंगों के दर्शन करवाएंगे और साथ ही सुनाएंगे इनसे जुड़ी ऐसी कथा जो अनसुनी और अनकही है। ऐसे गुप्त रहस्य जो अब तक आम भक्तों की जानकारी में नहीं हैं। पौराणिक साहित्य हो या वेद-पुराण, भाष्य, धर्मग्रन्थ, ब्राह्मण ग्रन्थ, उपनिषद में वाराणसी के स्वयम्भू शिवालयों का बहुत महत्व है। होगा भी क्यों नहीं, काशी वह तीर्थ है, जहां सारी दुनिया में सर्वाधिक स्वयम्भू शिवमंदिर स्थापित हैं। बनारस को शैव धर्म का केंद्र और तीर्थ कहा गया है। काशी के विद्वानों से बात करने पर पता चलता है कि यहां जितने भी शिंवलिंग है, जो स्वयं प्रकट हैं, कुल 20 से 25 हजार शिंवलिंग हो सकते हैं, जिसमें करीब 2 से 3 हजार तक स्वयम्भू होंगे। सारी सृष्टि में यह एक मात्र वह तीर्थ है, जहाँ शिवलिंगों के नाम सुनकर ही अचंभित हो जाएंगे। हालांकि स्कन्ध पुराण के चौथे खण्ड में ही लगभग 84 हजार स्वयम्भू शिवलिंगों की चर्चा है। इन्हें वर्तमान में खोजना भी एक बहुत कठिन कार्य है। अधिकांश स्वयम्भू शिवलिंगों के नाम भी पुराणों में अलग भी हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में लगभग 4 से 5 वैधनाथ धाम स्थित हैं किंतु मूल वैधनाथ ज्योतिर्लिंग दक्षिण भारत के चिदम्बरम से करीब 38 किलोमीटर दूर “वेदेहीश्वरम कोइल” में स्थित है, जहां सभी नवग्रह एक ही सीध या लाइन में बाबा वैधनाथ स्वागत हेतु खड़े हैं। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग एक नहीं, बल्कि दो हैं। भीमा औऱ शंकर ये दोनों ज्योतिर्लिंग दातावरम और कुमारावरम में दोनों एक दूसरे से 30 किलोमीटर की दूरी पर हैं। शंकर ज्योतिर्लिंग समुद्र तट पर है, जहां पानी के जहाज बनते हैं। यह दोनों मूल ज्योतिर्लिंग विशाखापतन्नम से 400 किलोमीटर दूर हैदराबाद मार्ग पर जंगल में समुद्र किनारे स्थापित हैं। महाराष्ट्र का भीमाशंकर स्वयम्भू शिंवलिंग है, क्यों कि गुरु गोरखनाथ ने वहां तप किया था। लेकिन मूल ज्योतिर्लिंग नहीं है। काशी की महिमा - काशी में चित्र-विचित्र और अटपटे नामों वाले शिंवलिंग हैं इसलिए ही इसे शिव की नगरी कहा जाता है। काशी दर्शन के समय कुछ प्राचीन शिंवलिंग, तो ऐसे थे जिसमें ब्राह्मणों की गृहस्थी वास कर रही है। दुर्लभ शिंवलिंग खोजने के लिए यहां बहुत मशक्कत करनी पड़ती है। काशी का इतिहास, स्कन्ध पुराण, शिवपुराण आदि ऐसा कोई प्राचीन ग्रंथ नहीं है जिसमें काशी के सन्त औऱ शिंवलिंग की चर्चा न हो। काशी खण्ड नामक पुस्तक में भी अनेकों शिवलिंगों का उल्लेख है। इस वीडियो में हम आपको काशी तीर्थ की यात्रा करायेंगे। पाठक गण यहां के मंदिरों के नाम पढ़कर भौचक्के हो सकते हैं। यहां शिंवलिंग साधू-सन्याशी चित्र-विचित्र अनोखे हैं। इस वीडियो को देखते हुए आपको यह जानकारी भी अवश्य पढ़नी चाहिए कि सनातन संस्कृति के सदृढ़ संस्कार, संस्कृत भाषा की रक्षा, धर्म का वैज्ञानिक आधार एवं प्रचार में काशी के विद्वान ब्राह्मणों का भारी योगदान है। देश की संस्कृति और परम्परा बनाये रखने में इनका योगदान अमूल्य है। बनारस की गंगा आरती के लिए देश-विदेश के असंख्य दर्शनार्थी बनारस आने के लिए सदैव आतुर रहते हैं। कुछ समय पूर्व तक सात समुद्रों के कूप और मन्दिर थे, जहां “सप्तसागर” महादान पूजा आदि होती थी। मथुरा, प्रयाग, पाटिलीपुत्र एवं उज्जैन में भी ऐसे सप्त कूपों का वर्णन मत्स्य पुराण के अध्याय २८७ में भी है। अथर्ववेद में काशी को केतु ग्रह की नगरी कहा है। यह सत्य भी हो सकता है क्योंकि केतु धर्म का विशेष कारक ग्रह है। सन्सार से मोह भंग करने केतु का ही काम है। काशी में जितने गृहस्थ लोग रहते हैं उससे दुगने यहां साधु-संत, महात्मा हैं। एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है - राढ़-साढ़, सन्यासी, मिलेंगे मथुरा काशी। "तिलक पत्रिका, एक अनूठा समाचार चैनल जो 24x7 प्रस्तुत करता है भारत के धार्मिक स्थलों की खबरें व अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां। इस चैनल के माध्यम से आप जुड़ते हैं भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के साथ। यहां आप हर दिन हर क्षण देख सकते हैं भारतीय मंदिरों और तीर्थ स्थलों की नवीनतम और महत्वपूर्ण खबरें। यह चैनल आपको समाचारों के साथ-साथ भारतीय धार्मिक स्थलों के अलौकिक दर्शन का अद्वितीय अनुभव भी प्रदान करता है, जिससे आप ईश्वर की विभिन्न महिमाओं के बारे में भी जानते हैं। ""तिलक पत्रिका"" में प्रस्तुत होने वाली हर खबर से जुड़ा है उस धार्मिक स्थल का इतिहास, महत्व और मान्यताएं, जिससे आप उस स्थल की अद्भुतता को भी समझते है। साथ ही यहां आप देखते हैं लाइव पूजा, आराधना और धार्मिक आयोजनों की विवरणात्मक रिपोर्टिंग भी। तो धर्मस्थलों की समस्त जानकारियां व नवीनतम समाचार लाइव एवं वीडियो के माध्यम से सबसे पहले देखने के लिए आज ही जुड़िये ""तिलक पत्रिका"" के साथ।" #Mahashivratri #Mahadev #varanasi #Shivling #SpiritualKnowledge #12JyotirlingStory"