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Ucchistha Ganapati Mantra Fast 1008 Times | उच्छिष्ट गणपति मंत्र Fast 1008 #ucchisthaganapatimantra #ucchistaganeshmantra #उच्छिष्टगणपतिमंत्र दक्षिणाचार साधना में शुचिता का ध्यान रखना परम आवश्यक होता है, लेकिन श्रीगणेश के उच्छिष्ट गणपति स्वरूप की साधना में शुचि-अशुचि का बंधन नहीं है। यह शीघ्र फल प्रदान करते हैं। प्राचीन ग्रंथों में इस बात का उल्लेख आता है कि पुराने समय में गणपति के इस स्वरूप या उच्छिष्ट चाण्डालिनी की साधना करने वाले अल्प भोजन से हजारों लोगों का भंडारा कर देते थे। कृत्या प्रयोग में इससे रक्षा होती है। गणेशजी के इस स्वरूप की पूजा, अर्चना और साधना से उच्च पद और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। कैसे होती है उच्छिष्ट गणपति की साधना उच्छिष्ट गणपति की साधना में साधक का मुंह जूंठा होना चाहिए। जैसे पान, इलायची, सुपारी आदि कोई चीज साधना के समय मुंह में होनी चाहिए। अलग-अलग कामना के लिए अलग-अलग वस्तु का प्रयोग करना चाहिए। वशीकरण के लौंग और इलायची का प्रयोग करना चाहिए। किसी भी फल की कामना के लिए सुपारी का प्रयोग करना चाहिए। अन्न या धन वृद्धि के लिए गुड़ का प्रयोग करना चाहिए। सर्वसिद्धि के लिए ताम्बुल का प्रयोग करना चाहिए। किसी के द्वारा अनिष्ट के लिए की गई क्रिया को नष्ट करने के लिए, विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए उच्छिष्ट गणपति की साधना करना चाहिए। इनका जप करते समय मुंह में गुड़, लौंग, इलायची, पताशा, ताम्बुल, सुपारी होना चाहिए। यह साधना अक्षय भंडार प्रदान करने वाली है। इसमें पवित्रता-अपवित्रता का विशेष बंधन नहीं है। उच्छिष्ट गणपति का मंत्र ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।। Ucchistha Ganapati Mantra Fast 1008 Times | उच्छिष्ट गणपति मंत्र Fast 1008