У нас вы можете посмотреть бесплатно बिरसा का उलगुलान और अबुआ दिशोम-अबुआ राज,The Great Tumult of Birsa and Self Governance, Suraj Dhurvey или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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भारतीय इतिहास के महान कोइतूर, क्रांतिसूर्य, महामानव, धरती आबा, भगवान बिरसा मुंडा की 145वीं जयंती पर हार्दिक नमन और सादर सेवा जोहार : डॉ सूर्या बाली “सूरज धुर्वे” भगवान बिरसा द्वारा धार्मिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक जागृति स्थापित करने के लिए शुरू किये गए अभूतपूर्व अभियान को आगे बढ़ाना और उनके द्वारा दिखाये गए रास्ते पर निडर होकर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। भगवान बिरसा के जन्म दिन के अवसर पर समस्त जनजातियों को एक कविता समर्पित है : - हे बिरसा ! क्या मैं मर गया हूँ ? अब मुझे कोइतूरों पर हो रहे अत्याचारों पर गुस्सा क्यूँ नहीं आता? अब मुझे अपने जल जंगल और जमीन की फिक्र क्यूँ नहीं होती ? अब माँ बहनों के साथ जबर्दस्ती और बलात्कार पर मेरा खून क्यूँ नहीं खौलता? अब अपने पुरखों और पेन ठानों के उजड़ने पर मुझे दुख क्यूँ नहीं होता? अब अपने सगे संबंधी और परिवारों के पिटने पर दर्द क्यूँ नहीं होता? अब अपने घर द्वार और ज़मीनों से विस्थापित होने पर छटपटाहट क्यूँ नहीं होती ? अब मुझे अपनी भाषा, पुनेम, संस्कृति को खत्म करने वालों पर गुस्सा क्यूँ नहीं आता ? अब मैं न्याय, समता, बंधुत्त्व और स्वतन्त्रता के लिए आवाज क्यूँ नहीं उठता ? शायद अब मैं मुर्दा हो गया हूँ ! लगता है मैं मर गया हूँ.... मैं मर गया हूँ ...मैं मर गया हूँ !! आज के इस पावन दिवस पर महामानव, क्रांतिसूर्य भगवान बिरसा मुंडा को कोटि कोटि नमन और सेवा जोहार तथा समस्त देशवासियों को भगवान बिरसा मुंडा की 145वीं जयंती पर बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ !! डॉ सूर्या बाली “सूरज धुर्वे” पूरे विवरण के लिए ये आलेख पढ़ें https://hindi.roundtableindia.co.in/?...