У нас вы можете посмотреть бесплатно संसार मेरी ही चेतना से प्रकाशित है | अष्टावक्र गीता अध्याय 2 – गहरी व्याख्या или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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इस वीडियो में अष्टावक्र गीता के अध्याय 2 के एक अत्यंत गहरे श्लोक की सरल और स्पष्ट व्याख्या की गई है। राजा जनक अपने आत्मज्ञान के अनुभव में कहते हैं – “संसार मेरी ही चेतना से प्रकाशित है।” इसका अर्थ यह है कि जो संसार हमें बाहर दिखाई देता है, उसका अनुभव भीतर की चेतना के कारण ही संभव होता है। आँखें, कान और मन केवल साधन हैं, लेकिन वास्तविक अनुभव करने वाली शक्ति हमारी चेतना है। इस वीडियो में नींद, जागरण और अनुभव के सरल उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया गया है कि संसार का अस्तित्व हमारे लिए तभी है, जब चेतना उपस्थित है। जैसे ही यह सत्य भीतर उतरता है, भय, चिंता और मोह अपने आप कम होने लगते हैं। अगर आप आत्मज्ञान, अद्वैत वेदांत और आध्यात्मिक समझ में रुचि रखते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा। 🙏 हरे कृष्ण 🌿 ashtavakra gita, ashtavakra gita hindi, adhyay 2 ashtavakra gita, raja janak story, chetna aur sansar, spiritual knowledge hindi, advait vedanta hindi, atma gyan, self realization hindi, adhyatmik gyan, vedanta philosophy, consciousness hindi, spirituality hindi, ashtavakra gita explanation #AshtavakraGita #अष्टावक्रगीता #आत्मज्ञान #चेतना #AdvaitVedanta #SpiritualAwakening #SelfRealization #Vedanta #Adhyatm #RajaJanak