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अगर आप ध्यान करते हैं या ध्यान शुरू करना चाहते हैं तो यह वीडियो आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस वीडियो में हम जानेंगे कि दिन की कौन-सी 4 घड़ियां ध्यान के लिए सबसे शक्तिशाली मानी जाती हैं और इन समय पर ध्यान करने से हमें मानसिक शांति, ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ कैसे मिलते हैं। कभी-कभी मन में एक शांत सा प्रश्न उठता है — ध्यान तो कोई भी समय किया जा सकता है, फिर संत लोग कुछ विशेष घड़ियों की बात क्यों करते हैं? क्या समय वास्तव में ध्यान की गहराई को प्रभावित करता है, या यह केवल साधना की सुविधा का विषय है? इन्हीं प्रश्नों को समझने का यह एक सरल प्रयास है। मनुष्य का जीवन केवल बाहरी गतिविधियों का प्रवाह नहीं है। भीतर भी एक सूक्ष्म लय चलती रहती है। दिन भर में मन की अवस्था बदलती रहती है — कभी स्पष्ट, कभी व्यस्त, कभी थका हुआ, कभी शांत। इसी कारण प्राचीन साधना परंपराओं में दिन की कुछ ऐसी घड़ियों का उल्लेख मिलता है जब मन स्वाभाविक रूप से थोड़ा स्थिर और ग्रहणशील हो जाता है। इस वीडियो में हम उन चार घड़ियों को समझने का प्रयास करेंगे जिनमें ध्यान करना कई साधकों के लिए सहज अनुभव बन सकता है। यह कोई कठोर नियम नहीं है। ध्यान का सार समय से बंधा नहीं है। फिर भी कुछ समय ऐसे होते हैं जब प्रकृति की गति थोड़ी धीमी और शांत होती है। उस समय मन भी अपेक्षाकृत सरलता से भीतर की ओर मुड़ सकता है। पहली घड़ी वह होती है जब रात धीरे-धीरे समाप्त हो रही होती है और दिन अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुआ होता। उस समय बाहरी संसार में शोर कम होता है और मन भी अपेक्षाकृत ताज़ा रहता है। कई साधक अनुभव करते हैं कि उस समय बैठना सहज होता है। दूसरी घड़ी दिन के मध्य की एक छोटी विराम जैसी होती है। जब सुबह की दौड़ कुछ शांत हो जाती है और मन थोड़ी देर रुक सकता है। तीसरी घड़ी सूर्य के ढलने के आसपास की होती है। दिन का सक्रिय भाग समाप्त हो रहा होता है और भीतर एक स्वाभाविक ठहराव आने लगता है। चौथी घड़ी रात के शांत समय की होती है, जब अधिकांश गतिविधियाँ समाप्त हो जाती हैं और मन दिन के अनुभवों से धीरे-धीरे मुक्त होने लगता है। संत कार्तिकानंद जी अक्सर समझाते हैं कि ध्यान किसी विशेष क्रिया का नाम नहीं है। यह भीतर लौटने की एक सरल प्रक्रिया है। जब मन बार-बार बाहर भागना छोड़ देता है, तब धीरे-धीरे स्पष्टता आती है। ध्यान का उद्देश्य किसी विशेष अनुभव को पकड़ना नहीं है। न प्रकाश देखना, न ध्वनि सुनना। असल में ध्यान का अर्थ है — स्वयं को देखना। जब मन थोड़ा शांत होता है तो भीतर प्रश्न उठ सकता है: मैं वास्तव में क्या खोज रहा हूँ? सत्य क्या है? शांति बाहर क्यों नहीं मिलती? वेदांत की सरल समझ यही कहती है कि जो शांति हम बाहर खोजते हैं, वह मूल रूप से हमारे ही स्वभाव में उपस्थित है। ध्यान उस सत्य को अनुभव करने का एक माध्यम बन सकता है। इसलिए इन चार घड़ियों को केवल एक सहायता की तरह समझें, नियम की तरह नहीं। यदि इन समयों में बैठना संभव हो तो अच्छा है, नहीं तो भी ध्यान किसी भी शांत क्षण में किया जा सकता है। महत्वपूर्ण यह नहीं कि हम कितनी देर बैठे। महत्वपूर्ण यह है कि हम कितनी ईमानदारी से भीतर देख पाए। यदि यह विचार आपके लिए उपयोगी लगा हो तो इस वीडियो को Like और Share कर सकते हैं ताकि और जिज्ञासु साधकों तक यह समझ पहुँचे। और यदि आप संत वाणी (Sant Vaani) के माध्यम से ऐसे ही शांत और चिंतनपूर्ण प्रवचन सुनना चाहते हैं, तो चैनल को Subscribe करना भी याद रखें। शायद अगली बार जब आप ध्यान के लिए बैठेंगे, तो यह प्रश्न भीतर उठे — क्या मैं केवल बैठ रहा हूँ, या वास्तव में स्वयं को जानने की दिशा में कदम रख रहा हूँ? 🟡 ध्यान का सही समय meditation time hindi dhyan kab karna chahiye char samay dhyan ke sant vaani satsang sant kartikanand ji vichar dhyan sadhana hindi atma gyan pravachan vedant samajh hindi inner silence meditation hindi dhyan ki saral vidhi self inquiry meditation hindi sant vaani dhyan marg adhyatmik jeevan marg dhyan aur man ki shanti spiritual understanding hindi vedantic meditation guidance atma chintan satsang sant vaani spiritual channel meditation awareness hindi dhyan ke anubhav kya hai sadhak ke prashn dhyan simple meditation explanation atma bodh ki baat sant kartikanand pravachan adhyatmik margdarshan hindi sant vaani dhyan satsang antarik shanti ka marg dhyan practice guidance hindi spiritual seeker questions hindi atma khoj ka marg dhyan ke samay ka arth sant vaani youtube satsang silent meditation reflection spiritual seekers hindi dhyan karne ka sahi samay meditation time dhyan kab kare meditation benefits dhyan karne ka tarika morning meditation spiritual meditation dhyan ki shakti meditation hindi spiritual knowledge 🟡 #SantVaani #ध्यान #MeditationHindi #आत्मज्ञान #ध्यानमार्ग #VedanticUnderstanding #आध्यात्मिकजीवन #InnerSilence #SelfInquiry ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ कभी शांत होकर अपने आप से यह प्रश्न पूछकर देखिए — क्या मैं ध्यान इसलिए करता हूँ कि मन शांत हो जाए, या इसलिए कि मैं स्वयं को वास्तव में समझ सकूँ? अपने अनुभव और विचार विस्तार से साझा करें। आपकी बात किसी और साधक के लिए भी उपयोगी हो सकती है। और यदि ऐसे ही शांत सत्संग सुनना चाहते हैं, तो Sant Vaani को subscribe करना न भूलें।