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🕉️ पूज्यश्री बलरामदास जी महाराज वेदांती द्वारा श्रीमद्भागवत कथा पूज्यश्री बलरामदास जी महाराज वेदांती के श्रीमुख से होने वाली श्रीमद्भागवत कथा एक अद्वितीय और दिव्य अनुभव होता है। महाराज श्री अपनी कथा में भक्ति और ज्ञान का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करते हैं, जो श्रोताओं को जीवन की गहन सच्चाइयों से जोड़ता है। 🌟 कथा की विशेषताएँ: वेदांती दृष्टिकोण: महाराज श्री का नाम ही उनके ज्ञान का परिचायक है। वे कथा के प्रत्येक प्रसंग को वेदांत दर्शन की कसौटी पर परखते हैं। वे केवल कथा नहीं सुनाते, बल्कि उसके पीछे छिपे आत्म-तत्व और ब्रह्म-ज्ञान को सरल भाषा में समझाते हैं। भाव और भक्ति का संगम: उनकी वाणी में भगवत् प्रेम का सहज प्रवाह होता है। वे भगवान श्री कृष्ण की माधुर्य लीलाओं और करुणा का वर्णन इतने भावपूर्ण तरीके से करते हैं कि श्रोता सहज ही भक्ति रस में डूब जाते हैं। सरल और सुबोध भाषा: कथा का स्वरूप भले ही दार्शनिक हो, लेकिन उनकी प्रस्तुति इतनी सरल और व्यवहारिक होती है कि सामान्य व्यक्ति भी कर्म, धर्म, मोक्ष, और माया जैसे कठिन विषयों को आसानी से समझ लेता है। सामाजिक एवं व्यावहारिक शिक्षा: महाराज श्री कथा के माध्यम से वर्तमान जीवन की समस्याओं और गृहस्थ धर्म के कर्तव्यों पर भी प्रकाश डालते हैं। वे भागवत के सिद्धांतों को आधुनिक जीवन से जोड़कर दिखाते हैं। 📜 प्रमुख आकर्षण: सटीक श्लोक उच्चारण: संस्कृत के श्लोकों का शुद्ध उच्चारण और उनका गहन विश्लेषण कथा को अकादमिक और आध्यात्मिक, दोनों स्तरों पर समृद्ध करता है। भजनों और कीर्तन का समावेश: कथा के बीच-बीच में भावपूर्ण भजन और कीर्तन वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना देते हैं। कृष्ण लीलाओं का दार्शनिक पक्ष: वे रास लीला, गोवर्धन लीला, और परीक्षित मोक्ष जैसे प्रसंगों को केवल कथा तक सीमित न रखकर उनके गूढ़ दार्शनिक अर्थ को उजागर करते हैं। पूज्यश्री बलरामदास जी महाराज वेदांती की श्रीमद्भागवत कथा श्रोताओं को जीवन जीने की कला सिखाती है और उन्हें परम सत्य की ओर प्रेरित करती है।