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👉 कुक्कुरवतिका सुत्त | मिथ्या तपस्या और बुद्ध का मध्यम मार्ग | कुक्कुरवतिका सुत्त मज्झिम निकाय का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और चेतावनी देने वाला उपदेश है, जिसमें भगवान बुद्ध यह स्पष्ट करते हैं कि हर प्रकार की तपस्या मुक्ति का मार्ग नहीं होती। यह सुत्त उन साधकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो यह मान लेते हैं कि शरीर को अधिक से अधिक कष्ट देना ही आध्यात्मिक उन्नति है। इस सुत्त की पृष्ठभूमि में दो तपस्वी आते हैं—एक जो कुत्ते के समान जीवन-व्रत का पालन करता है और दूसरा जो गाय के समान आचरण अपनाता है। दोनों का विश्वास है कि ऐसे कठोर और विचित्र आचरण से उन्हें शुद्धि और उच्च लोक की प्राप्ति होगी। बुद्ध इन तपस्वियों से करुणा और प्रज्ञा के साथ संवाद करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि जिस प्रकार का आचरण किया जाता है, उसी प्रकार की चेतना विकसित होती है और वही कर्म का बीज बनती है। इस ध्यानात्मक और विवेचनात्मक ऑडियो में बुद्ध के उस मूल संदेश को विस्तार से समझाया गया है कि मिथ्या तपस्या क्या है—ऐसी साधना जो बिना समझ, बिना करुणा और बिना प्रज्ञा के की जाती है। बुद्ध बताते हैं कि केवल बाहरी त्याग, वेश-परिवर्तन या शरीर को यातना देना मन को शुद्ध नहीं करता। वास्तविक तपस्या वह है जो लोभ, द्वेष और मोह को धीरे-धीरे क्षीण करती है और चित्त को शांत, करुणामय और जागरूक बनाती है। यह प्रस्तुति आधुनिक जीवन से जुड़े स्पष्ट और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से दिखाती है कि आज भी कैसे लोग गलत धारणाओं के कारण मिथ्या साधना में उलझ जाते हैं—कभी दिखावे के व्रतों में, कभी कठोर नियमों में, और कभी स्वयं को श्रेष्ठ मानने के अहंकार में। कुक्कुरवतिका सुत्त हमें सावधान करता है कि ऐसी साधना अंततः मुक्ति नहीं, बल्कि नए बंधन उत्पन्न करती है। बुद्ध का समाधान है—मध्यम मार्ग। न इंद्रिय-भोग में डूबना, न शरीर को अत्याचार देना। संतुलित जीवन, नैतिक आचरण, सजगता और प्रज्ञा—यही वह मार्ग है जो दुःख के अंत की ओर ले जाता है। इस ऑडियो में इस मध्यम मार्ग को सरल भाषा में, चिंतन के ठहरावों और आत्ममंथन के प्रश्नों के साथ प्रस्तुत किया गया है। यह धम्म-वाणी विशेष रूप से उन श्रोताओं के लिए है जो: सही और गलत साधना के अंतर को समझना चाहते हैं अंधी तपस्या और दिखावे के त्याग से मुक्त होना चाहते हैं बुद्ध की शिक्षाओं को दैनिक जीवन में उतारना चाहते हैं संतुलित, जागरूक और करुणामय जीवन जीना चाहते हैं कुक्कुरवतिका सुत्त हमें यह सिखाता है कि मुक्ति शरीर को दंड देने से नहीं, बल्कि मन को समझने से आती है। जब साधना प्रज्ञा से जुड़ती है, तभी वह मुक्तिदायक बनती है। 🌿 इस प्रवचन को शांत चित्त से सुनें और स्वयं जाँचें कि आपकी साधना आपको अधिक विनम्र, करुणामय और जागरूक बना रही है या नहीं। भवतु सब्ब मंगलं। सभी प्राणी सुखी हों। kukkuravatika sutta hindi, कुक्कुरवतिका सुत्त, mithya tapasya, wrong austerity buddha, buddha kukkuravatika sutta, buddha teachings hindi, buddhism hindi, dhamma talk hindi, middle path buddha, madhyam marg hindi, spiritual discourse hindi, buddhist sutta hindi, mindfulness hindi, inner purification, karma and conduct buddha, buddhist audio hindi, meditation hindi, buddha philosophy hindi, self awareness hindi #KukkuravatikaSutta #कुक्कुरवतिका_सुत्त #MithyaTapasya #मिथ्यातपस्या #BuddhaTeachings #बुद्धउपदेश #BuddhismHindi #बौद्धधर्म #MiddlePath #मध्यममार्ग #DhammaTalk #धम्मवाणी #SpiritualAwakening #आध्यात्मिकजागरण #Mindfulness #ध्यान #InnerTransformation #SelfRealization By: Jitendra Singh Jat jitendra.singh2104@gmail.com