У нас вы можете посмотреть бесплатно मेवाड़ का इतिहास (Part-1) | For REET, CET, LDC & Rajasthan Police गुहिल वंश से महाराणा कुंभा तक или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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Rajasthan Gk Notes Part 1 मेवाड़ का इतिहास गुहिलादित्य से महाराणा कुंभा तक #rajasthangk यह वीडियो मेवाड़ के इतिहास (भाग 1) पर एक विस्तृत जानकारी प्रदान करता है, जिसमें मेवाड़ की स्थापना से लेकर महाराणा कुंभा के शासनकाल तक की महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन है। यहाँ वीडियो के मुख्य बिन्दुओं का सारांश दिया गया है: मेवाड़ की प्रारंभिक जानकारी और दुर्ग चित्तौड़गढ़: इसका निर्माण चित्रांगद मौर्य ने करवाया था, जबकि महाराणा कुंभा को इसका आधुनिक निर्माता माना जाता है [00:26]। यह राजस्थान का सबसे बड़ा 'लिविंग फोर्ट' है जहाँ खेती भी की जाती है [00:36]। गुहिल वंश की स्थापना: गुहिलादित्य ने 566 ईस्वी में इस वंश की नींव रखी [03:30]। प्रमुख शासक और युद्ध बप्पा रावल (कालभोज): इन्होंने 734 ईस्वी में मान मौर्य को हराकर गुहिल वंश की वास्तविक सत्ता स्थापित की [03:53]। इन्होंने मेवाड़ में सर्वप्रथम सोने के सिक्के चलाए [04:23]। रावल जैत्र सिंह: इनके काल को मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णकाल कहा जाता है [07:56]। इन्होंने 1227 में 'भूताला के युद्ध' में इल्तुतमिश को पराजित किया और चित्तौड़ को अपनी राजधानी बनाया [07:01]। रावल रतन सिंह और पद्मनी: 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। यह मेवाड़ का प्रथम साका था, जिसमें रतन सिंह वीरगति को प्राप्त हुए और रानी पद्मनी ने 1600 रानियों के साथ जौहर किया [11:05]। सिसोदिया राजवंश का उदय राणा हम्मीर: इन्होंने 1326 में चित्तौड़ को वापस जीतकर सिसोदिया वंश की स्थापना की। इन्हें 'मेवाड़ का उद्धारक' और 'विषम घाटी पंचानन' कहा जाता है [14:45]। राणा लाखा: इनके समय में जावर में चाँदी की खान निकली और प्रसिद्ध पिछोला झील का निर्माण एक बंजारे द्वारा करवाया गया [16:20]। राणा चूड़ा: इन्हें 'मेवाड़ का भीष्म पितामह' कहा जाता है क्योंकि इन्होंने अपने पिता के विवाह की शर्त के कारण स्वेच्छा से सिंहासन का त्याग कर दिया था [18:04]। महाराणा कुंभा का स्वर्ण युग (1433-1468) विजय और स्मारक: मालवा विजय (1437) के उपलक्ष्य में कुंभा ने विजय स्तंभ का निर्माण करवाया [22:03]। इसे 'भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष' कहा जाता है। स्थापत्य कला: मेवाड़ के 84 दुर्गों में से 32 दुर्गों का निर्माण अकेले कुंभा ने करवाया था, जिसमें कुंभलगढ़ दुर्ग प्रमुख है [29:45]। साहित्यिक योगदान: कुंभा एक महान विद्वान और संगीतज्ञ थे (वीणा वादक)। उन्होंने 'संगीत राज', 'संगीत मीमांसा' और 'सूद प्रबंध' जैसे ग्रंथों की रचना की [31:07]। उपाधियाँ: उन्हें 'अभिनव भरताचार्य', 'हाल गुरु', 'शैल गुरु' और 'दान गुरु' जैसी कई उपाधियों से नवाजा गया था [32:17]। वीडियो के अंत में उल्लेख है कि कुंभा के पुत्र उदा ने उनकी हत्या कर दी थी, जिसे मेवाड़ का 'पितृहंता' कहा जाता है [33:02]