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मन को यहोवा की ओर उठाना_भजन संहिता 25 अध्याय part 1_Bible Study By-Sameer 📖 भजन संहिता 25:1–7 विषय: मन को यहोवा की ओर उठाना भजन संहिता 25 के पहले सात पदों में दाऊद अपने मन, आत्मा और जीवन को पूरी तरह यहोवा के हाथों में सौंप देता है। यह प्रार्थना विश्वास, आशा और पश्चाताप से भरी हुई है। दाऊद कठिन परिस्थितियों के बीच भी यहोवा पर भरोसा करता है और कहता है कि वह लज्जित न होगा, क्योंकि उसकी आशा परमेश्वर में है। इस अंश में हम सीखते हैं कि मन को यहोवा की ओर उठाना केवल भावनात्मक बात नहीं, बल्कि एक आत्मिक निर्णय है—जहाँ हम अपने भय, अपराधबोध और अतीत की गलतियों को छोड़कर परमेश्वर की दया और सच्चाई पर भरोसा करते हैं। दाऊद यहोवा से विनती करता है कि वह उसे अपने मार्ग और पथ सिखाए, सत्य के मार्ग में चलाए और उसकी जवानी के पापों को स्मरण न करे। यह हमें सिखाता है कि परमेश्वर केवल मार्गदर्शक ही नहीं, बल्कि क्षमा करने वाला और करुणामय पिता भी है। यह अध्ययन हमें प्रेरित करता है कि: हम अपना मन और आत्मा यहोवा पर लगाए रखें कठिन समय में भी परमेश्वर पर भरोसा करें परमेश्वर से उसके मार्ग सीखने की लालसा रखें अतीत के पापों से मुक्ति के लिए उसकी करुणा पर निर्भर रहें मन को यहोवा की ओर उठाना ही एक विजयी, शांति और विश्वास से भरा जीवन जीने की कुंजी है। #BhajanSanhita25 #Psalm25 #BibleStudyHindi #BibleStudy #PrarthnaAurVishwas #IshwarParBharosa #MargDarshan #Pashchatap #KripaAurSachchai #YehovaParAsha #DharmikJeevan #AatmaikShiksha #YeshuMasih #PavitraBible #VachanParAdharit keywords:-परमेश्वर पर भरोसा, प्रार्थना, मार्गदर्शन, दीनता, क्षमा, पापों की माफी, सत्य का मार्ग, यहोवा की करुणा, वाचा, शिक्षा, आत्मिक अगुवाई, शत्रुओं से रक्षा, लज्जा से बचाव, विश्वास, आशा, प्रभु की भलाई, डरने वालों को शिक्षा, जीवन का मार्ग, उद्धार, नम्र हृदय, प्रभु का भय, सत्य और दया