У нас вы можете посмотреть бесплатно Bhagwad Gita Shloka | 4. 40 | संशय का अंत – विश्वास का आरंभ | श्रीकृष्ण अर्जुन संवाद | AV202 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
🕉️ श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 4 – ज्ञानकर्मसंन्यासयोग, श्लोक 40 👉 "अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति। नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः॥" 📖 इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि अज्ञान, श्रद्धा का अभाव और संशय — ये तीनों ही मानव जीवन में विनाश के प्रमुख कारण हैं। जो संशय में जीता है, वह न इस लोक में सुख पाता है, न परलोक में, न ही आत्मिक शांति। ✨ इस वीडियो में आप पाएँगे: संस्कृत श्लोक का उच्चारण 🪔 शब्दार्थ और भावार्थ 🪷 मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और वैज्ञानिक व्याख्या 🧠 आधुनिक जीवन में व्यावहारिक अनुप्रयोग 🧭 प्रेरणा और आंतरिक स्पष्टता का मार्ग 🌿 📌 Next Episode: अध्याय 4 के अगले श्लोक की गहराई में उतरते हैं — जहाँ ज्ञान और श्रद्धा से आत्मबल का निर्माण होता है। 📢 Subscribe करें और जुड़ें ‘ADHYATMIK VARSHA’ परिवार से — जहाँ गीता केवल आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का विज्ञान है। 🌍 यह चैनल केवल भक्ति के लिए नहीं है, बल्कि धर्मयुद्ध जैसे आधुनिक जीवन संघर्षों में विजय पाने के लिए है। 🚩 स्वयं के लिए नहीं, दूसरों के लिए भी — ताकि हम मिलकर एक संतुलित और जागरूक समाज बना सकें। ⚠️ कॉपीराइट नोटिस: यह ऑडियो और इसकी सामग्री © ADHYATMIK VARSHA के अंतर्गत संरक्षित है। बिना अनुमति पुनःप्रकाशन वर्जित है। 🙏 ध्यान रखें: संशय का अंत ही आंतरिक शांति की शुरुआत है। #adhyatmikvarsha #bhagavadgita #krishnabhakti