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"भारतीय होने के बावजूद भी भारतीय न माने जाने का ग़म" ही क्या कम था चंदन डे के लिए कि अब ये फ़िक्र आ पड़ी- हिंदू होने के बावजूद वो नागरिकता के लिए आवेदन नहीं दे सकते क्योंकि नागरिकता क़ानून आदिवासी बोडोलैंड क्षेत्र में लागू नहीं है. अपनी टूटी-फूटी हिंदी में चंदन कहते हैं, "ऊ कानून तो जो नया लोग आएगा उस पर लागू होगा न, पर हम तो पुराना आदमी है हमको भी उनका तरह नया बना दिया. और क़ानून है न कि वो तो बीटीएडी (बोडोलैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेटिव डिस्ट्रिक्ट) में लगेगा नहीं." नरेंद्र मोदी सरकार की आईएलपी एरिया, असम, मेघालय, मिज़ोरम और त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों को क़ानून के दायरे से बाहर रखने की रणनीति ने क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध को कुछ कमज़ोर ज़रूर कर दिया है लेकिन इन इलाक़ों, ख़ास तौर पर बोडो क्षेत्र में बसे लाखों हिंदुओं के लिए नई मुश्किलें पैदा कर दी हैं. पेशे से शिक्षक संजय सम्मानित कहते हैं कि बाहर के हिंदुओं की रहने दें अमित शाह, पहले ये तो बताएं, "किस तरह, कितनी बार साबित करें कि हम इंडियन हैं." "नागरिकता संशोधन क़ानून यानी CAA से स्थानीय बंगालियों का कोई फ़ायदा नहीं है क्योंकि वो तो पहले से ही भारत के नागरिक हैं. क्या सरकार उनको भी शरणार्थियों के साथ मिलाएगी? और तब उनको नागरिक माना जाएगा!" ऐसे ही और दिलचस्प वीडियो देखने के लिए चैनल सब्सक्राइब ज़रूर करें- / @bbchindi बीबीसी हिंदी से आप इन सोशल मीडिया चैनल्स पर भी जुड़ सकते हैं- फ़ेसबुक- / bbcnewshindi ट्विटर- / bbchindi इंस्टाग्राम- / bbchindi बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें- https://play.google.com/store/apps/de...