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अगर यह भजन आपके हृदय को छुए, तो Like, Share और Subscribe ज़रूर करें। 🙏 राम… साईं… इस भजन में कबीर साहब के प्रसिद्ध दोहे हैं — “साईं इतना दीजिए”, “माला फेरत जुग भया” और “चलती चाकी देख के” — जिनके माध्यम से भूख, अहंकार, और संसार की चक्की में पिसते मानव जीवन का गूढ़ अर्थ सामने आता है। यह भजन याद दिलाता है कि सच्ची पूजा हाथों से नहीं, मन से होती है — और नाम-स्मरण ही इस भवसागर से पार ले जाता है। ------------------------------------------------------------ आह… राम… साईं… [DOHA 1] साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय। मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥ हे मालिक, बस इतना देना, जिससे सबका पेट भर जाए। मैं भी खाली न रहूँ कभी, और कोई भूखा न रह जाए। बस इतना रे दाता… बस इतना रे… [DOHA 2] माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका छोड़ दे, मन का मनका फेर॥ [ARTH] हाथों से पूजा करता रहा, मन भटकता ही जाए। मन को साध ले एक बार, तो राम खुद पास आए। [DOHA 3] चलती चाकी देख के, दिया कबीरा रोय। दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय॥ [ARTH] दुनिया की इस चक्की में, सब पिसते जाते हैं। जो नाम पकड़ ले समय रहते, वही पार हो पाते हैं। बस इतना रे दाता… राम… Kabir bhajan, Kabir doha bhajan, Sai Ram bhajan, Sant Kabir Vani, साईं इतना दीजिए, बस इतना रे दाता, spiritual bhajan, nirgun bhajan, Indian devotional song, Ram bhajan, Sai bhajan, Kabir ke dohe, bhakti song, Indian spiritual music, meditation bhajan, kabir amritvani, hindi bhajan, sufi bhajan india, inner peace bhajan, sant vani, #KabirBhajan #KabirDoha #SaiRam #BusItnaReData #SantKabir #BhaktiSong #NirgunBhajan #SpiritualMusic #IndianDevotional #RamBhajan