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दरोगा और दो कांस्टेबलों पर युवती के साथ मारपीट और छेड़खानी का लगा आरोप,कोर्ट द्वारा मुकदमें का आदेश होने पर भी करवाई नही करने का प्रेसवार्ता कर लगाया आरोप। गुलरिहा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली युवती ने गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि गांव के ही रहने वाले शत्रुघ्न,विनोद और अनिल से हमारा जमीनी विवाद चल रहा था। 25 अगस्त 2025 की रात 10 बजे विपक्षियों के प्रभाव में आकर दरोगा अंजनी कुमार तिवारी,कांस्टेबल हिमांशु सिंह व कांस्टेबल प्रदीप यादव शराब के नशे में हमारे घर में घुस गए और जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गंदी-गंदी गालियां और फर्जी मुकदमे में फसाने की धमकी देने लगे।जब हमारे माता पिता ने गाली देने से मना किया तो दरोगा और सिपाही बाल पकड़ कर हमको वहां पर पटक दिया और मारपीट किए जिसमे हमारी बहन का और मेरा हाथ व पैर टूट गया।पुलिस वालों ने हम लोगों का कपड़ा फाड़ कर नंगा कर दिया।बीच बचाव करने आए पिता और भाभी को भी पुलिस ने जमकर मारा पीटा है।और हमारे परिवार पर मुकदमा दर्ज कर दिया।हम लोग जमानत कराकर घर पहुचे,उसी रात यह तीनों पुलिसवाले बिना किसी महिला कांस्टेबल के प्राइवेट गाड़ी से हमारे घर आये,और मेरी बहन को खपड़हवा चौकी लेकर चले गए।जहां तीनों ने उसके साथ गंदी नीयत से छेड़खानी करने लगे। बहन के चिल्लाने और रोने पर 5 घंटे बाद करीब 3 बजे भोर में उसको 112 नम्बर की गाड़ी से वापस लाकर घर छोड़ दिया गया।हमने मामले की लिखित शिकायत गुलरिहा थाना पर किया।लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।थकहार हमने न्यायालय का शरण लिया और माननीय न्यायालय द्वारा दरोगा और कांस्टेबल को दोषी पाते हुए 9 दिसंबर 2025 को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश भी दिया।लेकिन दोषी पुलिसकर्मियों को बचाते हुए गुलरिहा पुलिस ने निर्दोषों को मुकदमे में शामिल कर दिया और पुलिस वालों का नाम शामिल नहीं किया गया।हमने पुलिस के उच्च अधिकारियों से मिलकर मामले की शिकायत किया हैं।लेकिन आज तक इन पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई नही हुआ।पीड़िता ने बताया कि एक हफ्ते तक इन पुलिसकर्मियों को वहां से हटा दिया गया।उसके बाद यह लोग फिर वहीं पर ड्यूटी कर रहे हैं।हम मांग करते हैं।कि मुकदमा दर्ज कर इन पुलिसकर्मियों को नौकरी से बर्खास्त किया जाए।ताकि भविष्य में किसी अन्य बहन बेटी के साथ इस तरह की घटना न होने पाए।