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भारत पर ब्राजील का विस्फोटक फैसला REES पॉवर सिर्फ भारत को देगा! रातों रात भारत को खजाना । इस महीने 18 से 22 तारीख के बीच ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inácio Lula da Silva की भारत यात्रा रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। यह सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन और सामरिक संसाधनों की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। ब्राजील की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और ब्राजील के बीच Rare Earth Elements (REEs) और विशेष रूप से Niobium को लेकर एक महत्वपूर्ण सहयोग समझौता होने की संभावना है। आज के दौर में रेयर अर्थ एलिमेंट्स आधुनिक रक्षा प्रणालियों, सेमीकंडक्टर, मिसाइल गाइडेंस, एयरोस्पेस स्ट्रक्चर और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अनिवार्य हो चुके हैं। फिलहाल इन तत्वों पर चीन का व्यापक नियंत्रण है, जबकि अमेरिका भी वैश्विक सप्लाई चेन पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में है। ब्राजील दुनिया में नियोबियम का सबसे बड़ा उत्पादक है। नियोबियम स्टील और सुपरएलॉय की मजबूती को कई गुना बढ़ाता है, जिससे मिसाइल एयरफ्रेम, जेट इंजन कंपोनेंट्स और हाई-स्ट्रेंथ डिफेंस प्लेटफॉर्म तैयार किए जाते हैं। भारत जब अपने स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम, एयर डिफेंस सिस्टम और उन्नत एयरोस्पेस क्षमताओं का विस्तार करेगा, तब इन तत्वों की मांग कई गुना बढ़ेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह समझौता केवल कच्चे माल की सप्लाई तक सीमित नहीं होगा, बल्कि Value Added Processing और Supply Chain Integration पर भी केंद्रित रहेगा। यानी भारत सिर्फ आयातक नहीं रहेगा, बल्कि प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन का हिस्सा बनेगा। हालांकि इस समझौते का वास्तविक औद्योगिक लाभ मिलने में 4 से 5 वर्ष का समय लग सकता है, लेकिन उसी समय भारत के भविष्य के मिसाइल डिफेंस और एडवांस वेपन सिस्टम बड़े पैमाने पर उत्पादन चरण में होंगे। यदि यह सहयोग सफलतापूर्वक लागू होता है, तो भारत को रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए चीन या अन्य दबाव वाली सप्लाई चेन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह समझौता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।