У нас вы можете посмотреть бесплатно Shiva Tandava Stotram | Powerful Shiva Aradhana Chant | सावन सोमवार विशेष | शिव तांडव स्तोत्र или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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यह दिव्य स्तुति, रावण द्वारा रचित, भगवान शिव के तांडव नृत्य, उनकी असीम शक्ति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का अद्भुत वर्णन करती है। जो आपको शिव भक्ति में लीन कर देगा और आंतरिक शांति प्रदान करेगा। 🔔 Benefits of Chanting: मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाता है नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास जगाता है भक्ति और शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायक 🎧 Headphones Recommended – यह उच्च गुणवत्ता वाला ऑडियो, डमरू, मृदंग, और गूंजते मंत्रों के साथ रिकॉर्ड किया गया है ताकि आप दिव्य स्पंदन का अनुभव कर सकें। 🎼 Composer & Lyricist: Lyrics: पारंपरिक (Traditional) (रावण द्वारा रचित) Composer & Singer: Shailendra Pratap Singh | @IAMSPSINGH 🎶 Music Category: Genre: Devotional / Spiritual Chant Sub-Genre: Hindu Stotra / Mantra Mood: Majestic, Fierce, Cosmic Energy 📀 Other Details: Language: संस्कृत (Sanskrit) Chant Type: Stotra (भक्ति स्तुति) Instruments: Damru, Mridangam, Nagada, Tabla, Veena, Sitar, Temple Bells, Shankh, Orchestral Percussion Ambience: Himalayan Echo, Temple Atmosphere Chant Style: Male Chorus, High-Energy Tandava Rhythm 💠 Subscribe करें और 🔔 Bell Icon दबाएं अधिक भक्ति गीतों के लिए। #ShivaTandava #shivastotram #शिवतांडवस्तोत्र #ShivaChanting #mahadevmantra 📖 Lyrics: 🎶 शिव तांडव स्तोत्र – Chanting Lyrics Version [Verse 1] जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावित स्थले गलेऽव लम्ब्य लम्बितां भुजंग तुंग मालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन् निनाद वड्ड मर्वयं चकार चण्ड ताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥१॥ [Verse 2] धराधरेन्द्र नंदिनी विलास बन्धु बन्धुर स्फुरद्दिगंत संतति प्रमोद मान मानसे। कृपा कटाक्ष धोरनी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥ [Verse 3] जटाभुजंग पिंगल स्फुरत्फणामणि प्रभा कदंब कंकुम द्रव प्रलिप्त दिग्वधूमुखे। मदांध सिंधुर स्फुरत्वग उत्तरीय मेदुरे मनोविनोद द्भुतं बिंभर्तुभूत भर्तरि ॥४॥ [Verse 4] सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेख शेखर प्रसून धूलि धोरनी विधूसरां घ्रिपीठभूः। भुजंगराज मालया निबद्ध जाट जूटकः श्रियै चिराय जायतां चकोर बंधु शेखरः ॥५॥ [Verse 5] ललाट चत्वर ज्वलद् धनंजय स्फुलिंग भा निपीत पंच सायकं नमन्निलिंपनायकम्। सुधामयूख लेखया विराजमान शेखरं महाकपाली संपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥६॥ [Verse 6] कराल भाल पट्टिका धगद्धगद्धग ज्वलद् धनंजया धरीकृत प्रचंड पंचसायके। धराधरेन्द्र नंदिनी कुचाग्र चित्र पत्रक प्रकल्पनैक शिल्पिनी त्रिलोचने रतिर्मम ॥७॥ [Verse 7] नवीन मेघ मंडली निरुद्ध दुर्धर स्फुरत् कुहु निशीथनी तमः प्रबद्ध बन्ध कन्धरः। निलिम्प निर्झरी धरस् तनोतु कृत्ति सिंधुरः कलानिधान बन्धुरः श्रियं जगन्धुरंधरः ॥८॥ [Verse 8] प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंच कालिम प्रभा विडंबि कंठ कंधरा रुचि प्रबंध कंधरम्। स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥९॥ [Verse 9] अखर्व सर्वमंगला कलाकदम्ब मंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्। स्मरांतकं पुरातकं भावांतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥१०॥ [Verse 10] जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंग म स्फुरद् धगद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्। धिमिद्धिमिद्धि मिध्वनन्मृदंग तुंगमंगल ध्वनिक्रम प्रवर्तितः प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥११॥ [Verse 11] दृषद्विचित्र तल्पयो र्भुजंग मौक्तिक मस्र जोर गरिष्ठ रत्न लोष्टयोः सुहृद्विपक्ष पक्षयोः। तृणारविंद चक्षुषोः प्रजामहीम हेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥१२॥ [Verse 12] कदा निलिंपनिर्झरी निकुंज कोटरे वसन् विमुक्त दुर्मतिः सदा शिरः स्थमंजलिं वहन्। विमुक्त लोल लोचनो ललाम भाललग्नकः शिवेति मंत्र मुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥१३॥ [Outro Verse] इमं हि नित्यमेव मुक्त मुक्तमोत्तम स्तवं पठन् स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्। हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥१६॥