У нас вы можете посмотреть бесплатно The Beauty of Poem◆कविता का सौन्दर्य◆Poetry by Samkit Jain◆कवि सम्मेलन◆ или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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कविता अच्छी या बुरी कहाँ होती हैं, वो तो बस भावों की ज़बां होती हैं, उसके लिए न काफिये मिलाने की ज़रूरत, न साहित्यिक शब्दों की, हाँ, उपयोगिता है तो बस हृदय के प्रवाह की थोड़े से उत्साह की, बाकी शब्द तो निमित्त हैं मूल तो कवि का चित्त है। कविता में, अक्षर लिखा नहीं, पिरोया जाता है हल्का हल्का उसमे खोया जाता है और कलम चलाने के लिए किताब मत खोजो दिखावा थोड़ी करना है दिल ही तो भरना है। तो बस मित्र उठाओ कलम और उतरो अपने अंतस्तल में निहारो स्वयं को जगत की हलचल में और जो सामने रखा पाओ गूद डालो उसे जैसे बचपन मे दीवाल पोतते थे बताओ क्या तब कुछ सोचते थे? नही, तो बस... वही निश्छलता सरलता लड़कपन मस्ती के साथ लो कलम अपने हाथ और बस लिखो.. लिखो..लिखो मत सुनाओ किसी को मत पढाओ किसी को वो काव्य तुम्हारा अपना है उन्हें तो बस वा..वा..वा.. ही जपना है चीटी की उमंग को संघर्ष भरी जंग को आज तक कौन समझा है भला। इसीलिए, अपने आप से ही गुफ्तगू करो खुद से ही कानाफूसी करो जो सार निकले, रुको लो कलम अपने हाथ और बस लिखो.. लिखो..लिखो छंद काव्य अलंकार इन को मत छेड़ो यह बाद की बातें हैं भविष्य की सौगातें हैं। क्या हुआ यदि अलंकार नहीं है माथे पर कोई भार तो नहीं है। ठीक है वह साहित्य नहीं होगा मगर स्व-हित्य तो होगा। लोग हसेंगे कुछ रो देंगे, मजाक करेंगे व्यंग की भी तान होगी मगर तब एक ही व्यक्ति होगा जिसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान होगी। वह व्यक्ति होंगे सिर्फ आप... कोशिश करते करते ही काफ़िया स्वतः मिल जाते है। भावों में बहते बहते ही काव्य कुमुद खिल जाते हैं। प्रेम अश्रुओं की स्याही से जब अक्षर सन जाते हैं। चलते चलते कलम पता नहिं कब हम कवि बन जाते हैं।। By- Samkit Jain