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श्रीमद्भागवत कथा | भाग 4 – अध्याय 15 🔱 इस अध्याय में हम महाराज ध्रुव के वंश और उनके महान जीवन आदर्शों का वर्णन सुनते हैं। भगवान श्रीहरि की कृपा से ध्रुव जी को दिव्य पद (ध्रुवलोक) प्राप्त हुआ और वे केवल एक बालक भक्त से महान आदर्श राजा बनकर संपूर्ण पृथ्वी का कल्याण करते हैं। अध्याय 15 में बताया गया है कि भगवान के दर्शन के बाद ध्रुव जी का हृदय पूर्णतः बदल जाता है। अब उनमें न तो क्रोध रहता है, न प्रतिशोध — वे करुणामय, धर्मपरायण और प्रजावत्सल राजा बन जाते हैं। वे अपने राज्य का पालन धर्म, सत्य और न्याय से करते हैं तथा सभी प्रजाजनों को सुखी बनाते हैं। इस अध्याय से हमें सीख मिलती है कि सच्ची भक्ति मनुष्य के स्वभाव को बदल देती है। भगवान की कृपा मिलने पर अहंकार समाप्त हो जाता है और व्यक्ति लोककल्याण के मार्ग पर चल पड़ता है। ध्रुव जी का जीवन | #sanatanpravah #vijayarora #daadiwalebaba #onelinethatmatters #harharmahadev