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इस वीडियो/पोस्ट में हम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के इतिहास के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करेंगे। प्रमुख अधिवेशन: 1885 (बम्बई) से लेकर 1929 (लाहौर) के पूर्ण स्वराज तक। भूमि सुधार: स्वतंत्रता के बाद जमींदारी उन्मूलन और भूदान आंदोलन का प्रभाव। मजदूर और उद्योग: नेहरू और गांधीजी के औद्योगिक विचार। प्रसिद्ध नारे: "पूर्ण स्वराज" और "आराम हराम है" जैसे ऐतिहासिक वक्तव्य। यह जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, Railway) और इतिहास प्रेमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (स्थापना: 28 दिसंबर 1885) ने स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई। प्रमुख अधिवेशन (1885 बम्बई-व्योमेशचन्द्र बनर्जी), भूदान आंदोलन, जमींदारी उन्मूलन, और "पूर्ण स्वराज" जैसे नारों के साथ, कांग्रेस ने समाजवाद, मजदूरी और भूमि सुधारों को प्राथमिकता दी। 'भूमि जोतने वाले की' गांधीवादी नीति और नेहरू का 'आराम हराम है' संदेश प्रसिद्ध हैं। कांग्रेस के प्रमुख अधिवेशन: प्रथम (1885, बम्बई): व्योमेशचन्द्र बनर्जी (स्थापना) लाहौर (1929): जवाहरलाल नेहरू (पूर्ण स्वराज की मांग) अमरावती (1897): सी. शंकर नायर भू-सुधार और नीति: गांधीजी की नीति: 'भूमि और समस्त संपत्ति उसी की है जो उस पर खेती करेगा' (भूमि को जोतने वाले को मिलना) स्वतंत्रता बाद: जमींदारी उन्मूलन अधिनियम (1950), किरायेदारी सुधार, और भूदान आंदोलन (विनोबा भावे, 1951) कांग्रेस पर प्रमुख टिप्पणियाँ व वक्तव्य: गांधीजी: जमींदारों के प्रति नरम रुख, उन्हें मित्र बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने की नीति नेहरू: "आराम हराम है" (औद्योगीकरण के लिए) प्रमुख नारे: "पूर्ण स्वराज" (1929) "इंकलाब जिंदाबाद" (भगत सिंह द्वारा, कांग्रेस आंदोलनों में गूंजा) मजदूर संघ और Udyog: कांग्रेस ने All India Kisan Sabha और मजदूर यूनियनों का समर्थन किया भूमि नीति में बिचौलियों का उन्मूलन और भूमि जोतों का समेकन शामिल था