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1. जब एक पारसी प्रेत भाईजी के सामने आया! 👻 हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के वो दिव्य अनुभव जो आपको हैरान कर देंगे! ✨🙌 2. भाईजी ने क्यों ठुकराया 'भारत रत्न'? 🇮🇳 गीता प्रेस के असली नायक की वो गुप्त बातें जो कोई नहीं जानता! Spoke to a Spirit: The Chilling Encounter That Changed This Saint's Life Forever Disclaimer: We leverage AI and modern technology to explore deep spiritual concepts from the puranas, public discourses and rasik literature. While tools assist our research, the essence remains purely human. Every video is rigorously reviewed to ensure the sentiment and truth stay authentic to sanatan dharma. भक्ति मार्ग में भाव की प्रधानता होती है। इसे स्वीकार करना या न करना पूर्णतः आपके विवेक और आस्था पर निर्भर है। Playlist: • Shri Krishna Chaitanya Mahaprabhuji Hanuman Prasad Poddar, Bhaiji, Gita Press Gorakhpur, Kalyan Magazine, History of Gita Press, Shri Hanuman Prasad Poddar Biography, Indian Freedom Fighter, Saintly Revolutionary, Radhashtami Mahotsav, Radha Krishna Bhakti, Gita Vatika, Kalyan Kalpataru, Bhagavad Gita Hindi, Ramayana Gita Press, Hindu Culture, Premanand Ji Maharaj, Radha Baba, Anushilan Samiti, Indian Saints, Bhakti Yoga, Spiritual Teachings, Sharanagati, Gorakhpur Saints, Sanatan Dharma इस वीडियो में हम परम पूज्य भाईजी श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के उन प्रेरणादायक प्रसंगों और उपदेशों को जानेंगे, जो किसी भी साधक या महाप्रभु जी के अनुयायी के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उसे परम शांति और भगवद प्राप्ति की ओर ले जा सकते हैं। व्यवहार में सकारात्मक बदलाव के प्रमुख सूत्र: 1. निस्वार्थ सेवा और परोपकार (Nishkam Karma): भाईजी का पूरा जीवन दूसरों की भलाई के लिए समर्पित था। उन्होंने सिखाया कि सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि ईश्वर की आराधना का एक रूप है। चाहे वह बाढ़ पीड़ितों की मदद हो, कुष्ठ रोगियों की सेवा हो या गरीब कन्याओं का विवाह, भाईजी ने हमेशा यह सिखाया कि "दाहिने हाथ को पता न चले कि बाएं हाथ ने क्या दिया है।" जब एक साधक इस भाव से सेवा करता है कि सामने वाला व्यक्ति साक्षात नारायण का रूप है, तो उसके भीतर का क्रोध, अहंकार और स्वार्थ स्वतः ही समाप्त हो जाता है। 2. ईश्वर की सर्वव्यापकता का दर्शन (Seeing God in Everyone): भाईजी के अनुसार, यदि हम अपने व्यवहार को सुधारना चाहते हैं, तो हमें हर प्राणी में भगवान को देखना चाहिए। उन्होंने सिखाया कि जल, थल, वृक्ष, पशु और मनुष्य—सब ईश्वर के ही अंग हैं। जब एक अनुयायी इस सत्य को स्वीकार कर लेता है, तो वह किसी के प्रति भी द्वेष, घृणा या शत्रुता का भाव नहीं रख सकता। यह विचार अनुयायियों को अधिक दयालु, विनम्र और सहनशील बनाता है, जिससे उनके सामाजिक संबंधों में मधुरता आती है। 3. निरंतर नाम जप की शक्ति (Power of Continuous Chanting): भाईजी ने जेल के एकांत और गंभीर बीमारी के कठिन समय में भी 'भगवन-नाम' के जप को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने अनुभव किया कि निरंतर जप करने से मन के विकार दूर होते हैं और हृदय में दिव्यता का संचार होता है। साधकों के लिए संदेश यह है कि जब मन भगवान के नाम में लगा रहता है, तो वह सांसारिक प्रपंचों और बुराइयों से बचा रहता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। 4. पूर्ण शरणागति और अहंकार का त्याग (Total Surrender): भाईजी ने सिखाया कि "शरणागति" का अर्थ है अपनी बुद्धि, रुचि और अहंकार को भगवान के चरणों में समर्पित कर देना। जब साधक यह मान लेता है कि "मैं कुछ नहीं हूँ, जो कर रहे हैं मेरे प्रभु ही कर रहे हैं," तो वह परिणाम की चिंता और भय से मुक्त हो जाता है। यह समर्पण अनुयायियों को कठिन से कठिन परिस्थिति में भी अडिग रहने और मानसिक तनाव से बचने की शक्ति प्रदान करता है। 5. विनम्रता और सम्मान (Humility and Respect): भाईजी ने भारत रत्न और राय बहादुर जैसी बड़ी उपाधियों को बड़ी विनम्रता से ठुकरा दिया। उनका मानना था कि असली धन पद या प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि भगवान की भक्ति में है। अनुयायियों के लिए यह एक महान पाठ है कि संसार में रहते हुए भी कैसे अहंकार से दूर रहा जाए। दूसरों का सम्मान करना और स्वयं मान की इच्छा न रखना, एक साधक के व्यवहार को अत्यंत प्रभावशाली और शांतिपूर्ण बना देता है। 6. विपत्ति को प्रभु की कृपा मानना (Positive Outlook in Adversity): भाईजी ने सिखाया कि जीवन में आने वाले कष्ट और बीमारियाँ भी भगवान की 'विशेष कृपा' हैं, जो हमें शुद्ध करने के लिए आती हैं। इस सकारात्मक सोच ने अनुयायियों को सिखाया कि विफलता या दुःख के समय टूटने के बजाय उन्हें प्रभु का मंगलमय विधान मानकर स्वीकार करना चाहिए। सकारात्मक परिणाम: जब महाप्रभु जी के अनुयायी इन सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारते हैं, तो उनके व्यक्तित्व में अद्भुत निखार आता है। वे न केवल एक बेहतर इंसान बनते हैं, बल्कि समाज में शांति और प्रेम का संदेश फैलाते हैं। इस मार्ग पर चलने से अंतःकरण शुद्ध होता है और साधक को इसी जीवन में भगवद-प्रेम का रसास्वादन प्राप्त होता है। निष्कर्ष: यह वीडियो आपको भाईजी के उन गुप्त आध्यात्मिक रहस्यों से परिचित कराएगा जो आपकी जीवनशैली को पूरी तरह बदल सकते हैं। यदि आप भी अपने जीवन में सुख, शांति और ईश्वर का सानिध्य चाहते हैं, तो भाईजी के इन पावन प्रसंगों को अंत तक देखें और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें। हनुमान प्रसाद पोद्दार, भाईजी, गीता प्रेस, भक्ति, शरणागति, सकारात्मक व्यवहार, आध्यात्मिक जीवन, ईश्वर दर्शन, जनकल्याण, गीता प्रवचन। #AI-assisted