У нас вы можете посмотреть бесплатно देवलगढ़ का इतिहास II 𝗵𝗶𝘀𝘁𝗼𝗿𝘆 𝗼𝗳 𝗗𝗲𝘃𝗮𝗹𝗴𝗮𝗿𝗵 II राज राजेश्वरी देवी देवल गढ़ केंसे आई? или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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नमस्कार स्वागत है आपका, मित्रो कई लोगों को मालूम नही होगा कि देवल गढ़ का इतिहास क्या है? चलिए आपको इस व्लॉग के द्वारा देवल गढ़ के इतिहास के बारे मे अवगत करता हूं. आदरणीय कुंजिका प्रसाद उनियाल जी, जो कि राज राजेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी हैँ उनसे जानते हैँ ऐतिहासिक और पौराणिक देवल गढ़ के इतिहास के बारे मे. #devalgarh #paurhigarhwal #exploringuttrakhand #uttrakhandvillagelife देवलगढ़ का उत्तराखण्ड के इतिहास में अपना एक अलग ही महत्व है। प्राचीन समय में उत्तराखण्ड 52 छोटे-छोटे सूबों में बंटा था जिन्हें गढ़ के नाम से जाना जाता था और इन्ही ने नाम पर देवभूमि का यह भूभाग गढ़वाल कहलाया। 14वीं शताब्दी में जब राजा अजयपाल चांदपुर गढ़ में सिंहासनारुढ़ हुये तो उन्होने देवलगढ़ जो कि सामरिक दृष्टि से बहुत ही सुरक्षित स्थान था को 1512 में अपनी राजधानी बनाया। किंतु लगभग 5 वर्ष पश्चात अलकनन्दा के तट पर श्रीनगर में स्थापित किया था । अपने 19 वर्षों के शासनकाल में राजा अजयपाल ने देवभूमि के 48 गढ़ों को जीतकर अपने राज्य का विस्तार किया था। राज राजेश्वरी गढ़वाल के राजवंश की कुलदेवी थी । राज राजेश्वरी मन्दिर देवलगढ़ का सबसे अधिक प्रसिद्ध ऐतिहासिक मन्दिर है। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी के राजा अजयपाल द्वारा ही करवाया गया था । गढ़वाली शैली में बने इस मन्दिर में तीन मंजिलें हैं । तीसरी मंजिल के दाहिने कक्ष में वास्तविक मंदिर है। यहां देवी की विभिन्न मुद्राओं में प्रतिमायें हैं। इनमें राज-राजेश्वरी कि स्वर्ण प्रतिमा सबसे सुन्दर है। इस मन्दिर में यन्त्र पूजा का विधान है। यहां कामख्या यन्त्र, महाकाली यन्त्र, बगलामुखी यन्त्र, महालक्ष्मी यन्त्र व श्रीयन्त्र की विधिवत पूजा होती है। संपूर्ण उत्तराखण्ड में उन्नत श्रीयन्त्र केवल इसी मन्दिर में स्थापित है। मन्दिर के पुजारी द्वारा आज भी यहां दैनिक प्रात:काल यज्ञ किया जाता है। नवरात्रों में रात्रि के समय राजराजेश्वरी यज्ञ का आयोजन किया जाता है। इस सिद्धपीठ में अखण्ड ज्योति की परम्परा पीढ़ियों से चली आ रही है। अत: इसे जागृत शक्तिपीठ भी कहा जाता है। आप लोग इसी तरह प्यार और आशीर्वाद बनाये रखेंगे ऐंसी आशा करता हूं My village life : • मेरा गांव मेरा देश 𝗜𝗜 बड़ा हादसा हो गया𝗜𝗜𝗠𝘆... Deval Garh : • देवलगढ़ II गढ़वाल नरेश की ऐतिहासिक राजधानी I... अद्भुद पांडव नृत्य : • अद्धभुत पांडव नृत्य II चड़ी गांव खिर्सू II ... मंसार मेला : • मंसार मेला II उत्तराखण्ड का ऐतिहासिक कौथिग... Sumadi ke Panthya Dada : • सुमाड़ी के पंथ्या दादा कौन थे?𝗜𝗜𝗦𝘂𝗺𝗮𝗿𝗶 𝗸𝗮 𝗣... Sumari village vlog : • सुमाड़ी गांव 𝗜𝗜 पौड़ी का एक ऐतिहासिक और सम्प... History of Sumari Village : • सुमाड़ी गांव का इतिहास II गौलक्ष से सुमाड़ी ... पूरा गांव ही उजड़ गया : • झाला गांव खिर्सू II पूरा गांव ही उजड़ गया I... उत्तराखंड का लद्दाख : • उत्तराखंड का लद्दाख II सिलपाटा गाँव II जहा... घसेरियों ने लूट लिया : • गांव वापसी II पौड़ी गढ़वाल की घाटियों की यात... Nishni Village Part 1 : • निशणी गांव II क्या यह पौड़ी गढ़वाल का सबसे ब... Falswadi Village : • फलस्वाड़ी गांव II सीता माता का मायका II एक ... Chandpur Garh Fort : • चांदपुरगढ़ी किल्ला जिसे गढ़वाल नरेश ने छोड़ द... What is the history of Devalgarh? Which ruler capital was Devalgarh? देवलगढ़ किस शासक की राजधानी थी? Which district is Devalgarh in? Which ruler capital was Devalgarh? #uttarakhand,#uttarakhandtourism, #Gauradevi ##richcilture #richvillageuttrakhand #himalayanjogi #paurigarhwal #villagelife #khirsu #garhwalhimalaya #shrinagargarhwal #history #garhwalhistory #britishgarhwal #panthyakala #garhwalhistory #uttrakhandtourism #uttrakhandtour #uttrakhandibloger #uttrakhandilifestyle #pahadiculture #garhwalsamrat #travel #palayan #garhnaresh #devalgarh #52garh #khirsu #Chorkandivillage #paurigarhwal,#uttarakhandrituals,#ritiriwaaj #Solotraveller