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संविधान में उल्लिखित मूल अधिकार (0:13) व्यक्ति के भौतिक और नैतिक विकास (0:18) के लिए आवश्यक हैं, साथ ही ये राज्य के खिलाफ व्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करते हैं (0:31-0:38)। भारत में मूल अधिकारों की आवश्यकता (0:41): जनता में साक्षरता के अभाव और अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी के कारण राज्य द्वारा हनन की आशंका (0:43-0:53)। कार्यपालिका के विधायिका पर बहुमत के कारण सरकार द्वारा मूल अधिकारों को छीनने वाले कानून बनाने का डर (0:55-1:06)। भारत में धार्मिक और नस्लीय विविधता के कारण अल्पसंख्यक वर्गों के हितों की रक्षा (1:07-1:20)। संघात्मक पद्धति में प्रांतों द्वारा नागरिकों के अधिकार छीनने के प्रयास को रोकने के लिए संविधान में गारंटी (1:23-1:37)। जनता को यह बोध कराना कि संविधान की नजर में कोई विशेष नहीं है, सभी के अधिकार और उत्तरदायित्व समान हैं (1:38-1:47)। दलित, आदिवासी, शोषित और स्त्रियों जैसे सदियों से दमन के शिकार वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए (1:48-1:59)। संवैधानिक उपबंध और विशेषताएँ (2:01-3:49): मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिए गए हैं (2:04)। संविधान के भाग तीन (2:06) में अनुच्छेद 12 से 35 तक इनका उल्लेख है। भाग तीन को भारत का मैग्नाकार्टा (2:13) कहा जाता है। ये न्यायोचित प्रकृति (2:16) के हैं, यानी इनके हनन पर न्यायालय जाया जा सकता है (3:13-3:15)। मूल संविधान में सात मूल अधिकार थे, वर्तमान में केवल छह हैं (2:27-2:31)। 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा संपत्ति के अधिकार को हटाकर अनुच्छेद 300 क (2:32-2:39) में कानूनी अधिकार बना दिया गया। मूल अधिकारों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गारंटी और सुरक्षा (3:17-3:19) दी जाती है। ये राज्य के खिलाफ प्राप्त अधिकार हैं (3:21-3:24) और असीमित नहीं हैं (3:27)। राज्य द्वारा इन्हें युक्ति युक्त निर्बंधनों के आधार पर सीमित किया जा सकता है (3:28-3:34)। ये अस्थायी नहीं हैं; संसद अनुच्छेद 368 (3:37) के तहत इनमें संशोधन कर सकती है (3:37-3:42)। राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352 (3:44)) के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 (3:47) को छोड़कर समस्त मौलिक अधिकार निलंबित किए जा सकते हैं (3:44-3:49)। मूल अधिकारों से संबंधित अनुच्छेद (3:52): अनुच्छेद 12: राज्य की परिभाषा (3:56-4:07, 7:06-8:21) में संघीय सरकार, संसद, राज्य सरकारें, विधानमंडल, स्थानीय निकाय (नगरपालिका, पंचायत), और अन्य प्राधिकारी (LIC, ONGC, SAIL) शामिल हैं। उच्चतम न्यायालय के अनुसार कोई भी निजी इकाई या एजेंसी जो बतौर राज्य की संस्था के रूप में काम कर रही है, वह भी राज्य के अर्थ में आती है। अनुच्छेद 13: मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियाँ (4:08-4:14, 8:28-8:30)। यह न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्विलोकन (8:38-8:49) की शक्ति प्रदान करता है। अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समता और विधियों के समान संरक्षण (15:37-15:44)। विधि के समक्ष समता: ब्रिटिश मूल (15:48), सभी एक समान, किसी को विशेष अधिकार नहीं (16:13-16:20)। यह नकारात्मक संदर्भ लिए हुए है (17:25-17:27)। विधियों के समान संरक्षण: अमेरिकी संविधान से (15:50-15:53), समान परिस्थितियों में समान व्यवहार (16:21-16:29)। यह सकारात्मक संदर्भ लिए हुए है (17:28-17:34)। अपवाद: राष्ट्रपति, राज्यपाल, सांसदों, विदेशी शासकों, राजनयिकों को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं (18:07-19:20)। अनुच्छेद 15: धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का प्रतिषेध (19:24-19:30)। 1 अनुच्छेद 16: लोक नियोजन में अवसर की समानता (21:55-21:58)। 1 अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का अंत (27:11-27:14)। अस्पृश्यता निरोधक अधिनियम 1955 (27:26) (जो बाद में सिविल अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत (28:18-29:05)। राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अलावा कोई अन्य उपाधि प्रदान नहीं करेगा। भारतीय नागरिक विदेशी राज्य से उपाधि नहीं ले सकता। अनुच्छेद 19: अभिव्यक्ति व अन्य स्वतंत्रताएं (29:15-29:21)। इसमें छह प्रकार की स्वतंत्रताएँ हैं, जिन पर युक्ति युक्त निर्बंधन लगाए जा सकते हैं (31:32-33:17)। । अनुच्छेद 20: अपराधों के लिए दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण (33:20-33:26)। अनुच्छेद 21: प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता (34:34-34:37)। अनुच्छेद 22: कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण (5:09-5:21)। शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24) (5:22-5:34): अनुच्छेद 23: मानव के बलात् श्रम व दुर्व्यापार का प्रतिषेध (5:25-5:28)। अनुच्छेद 24: कारखाना आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध (5:30-5:32)। धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28) (5:35-5:57): अनुच्छेद 25: अंतःकरण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता (5:39-5:42)। अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंधन की स्वतंत्रता (5:43-5:45)। अनुच्छेद 27: किसी विशेष धर्म को संपोषित करने वाले करों के सदाय के बारे में स्वतंत्रता (5:46-5:49)। अनुच्छेद 28: कुछ शिक्षा संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्वतंत्रता (5:51-5:57)। संस्कृति और शैक्षणिक अधिकार (अनुच्छेद 29-30) (5:57-6:10): अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण (6:00-6:02)। अनुच्छेद 30: शिक्षा संस्थाओं के स्थापना एवं प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार (6:04-6:09)। संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32) (6:18-6:25): अन्य उपबंध (अनुच्छेद 33-35) (6:25-6:46): अनुच्छेद 33: बलों आदि को अधिकारों को लागू होने में रूपांतरण करने की संसद की शक्ति। अनुच्छेद 34: सेना विधि प्रवृत्त होने पर अधिकारों का निर्बंधन। अनुच्छेद 35: इस भाग के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए विधान।