У нас вы можете посмотреть бесплатно जयदेव की रचना गीत गोविन्द की राधा कृष्ण के प्रेम रस की अनुभूति के लिए सुनें ललितलवंगलता परिशीलन или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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जय जय देव हरे जय जय देव हरे राधा माधव प्रेम रस जय जय देव हरे॥ 1. ललितलवङ्गलता परिशीलन कोमल मलय समीरे मधुकर निकर करम्बित कोकिल कूजित कुञ्ज कुटीरे विहरति हरिरिह सरस वसन्ते नृत्यति युवतिजन संग सखि विरहिजनस्य दुरन्ते॥ 2. चन्दन चर्चित नील कलेवर पीत वसन वनमाली केलि चलन्मणि कुण्डल मण्डित गण्डयुग स्मितशाली हरिरिह मुग्ध वधूनिकरे विलासित रस विहारी जय जय देव हरे॥ 3. स्मर गरल खण्डनं मम शिरसि मण्डनं देहि पद पल्लवमुदारम् मधुरिपु चरण सरोज भव भय हरनं जय जय देव हरे॥ 4. प्रिय चरण कमल मकरन्द रसिक हृदय विहारी राधा संग रास रचत मुरली धुन सुखकारी नृत्यति ब्रज सुन्दरी संग शोभित वन बिहारी जय जय देव हरे॥ 5. मधुर मनोहर मुरली ध्वनि मधुबन में गूँजती राधा नाम जपत हरि प्रेम सुधा बरसती श्याम सुन्दर मनमोहन भक्तन हृदय विराजे जय जय देव हरे॥ Outro राधे गोविन्द जय जय माधव मुरारी भक्त जनों के जीवन तुम ही रखवाले जय जय देव हरे जय जय देव हरे॥ #cgshorts #shiva #cg #shivatandava #cgsong #raipur #संस्कृति #police #adiyogishiva #krishna #radhamohan