У нас вы можете посмотреть бесплатно Jaipur Ganesh Ji Mahotsav Shobha Yatra 2023 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
इस साल देश भर में गणेश चतुर्थी 19 से 29 सितंबर तक मनाया जाएगा. विघ्नहर्ता श्रीगणेश की सबसे पहले पूजा होती है. आइए आपको इस गणेश चतुर्थी पर जयपुरवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र मोती डूंगरी में स्थित भगवान श्रीगणेशजी को राजभोग-चपाती, बाटी, चूरमा, दाल,कढी, सब्जी का भोग लगाया जाता है. प्रथम पूजनीय है भगवान गणेश प्रथम पूजनीय है श्री गणेश हिन्दू मान्यता के अनुसार भगवान श्री गणेश प्रथम पूजनीय है. किसी भी पूजन कार्य को प्रारंभ करने से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है. पुराणों के अनुसार भगवान ब्रम्हा जी के द्वारा सभी देवताओं से कहा गया कि जो पहले पूरे ब्रम्हांड का चक्कर लगा कर पहुंचेगा उसकी सबसे पहले पजूा होगी. सभी देवता अपने वाहनो से पूरे ब्राम्हांड का चक्कर लगाने निकल पड़े. श्री गणेश जी प्रखर बुद्धि के धनी थे. गणेश जी ने अपने माता और पिता के चक्कर लगा कर पृथ्वी आकाश की परिक्रमा सबसे पहले पूरी कर ली और तब से वो सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय है. जयपुरवासियों की आस्था है मोती डूंगरी गणेश में हिन्दू धर्म के किसी भी धार्मिक कार्य में विघ्नहर्ता श्रीगणेश की सबसे पहले पूजा होती है.आइए आपको इस गणेश चतुर्थी पर जयपुरवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र मोती डूंगरी में स्थित भगवान श्रीगणेशजी के दर्शन करवाते हैं. जयपुर में मोतीडूंगरी की तलहटी में विराजमान इस मंदिर में भगवान श्रीगणेश की बड़े आकार की भव्य मूर्ति के दर्शनों के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. लंबोदर इस दरबार में आने वाले हर भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं. बस ये ही कारण है की भगवान श्रीगणेश के प्रति आस्था का सैलाब दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. गणेश चतुर्थी की मोतीडूंगरी गणेश मंदिर की सन 1982 की दुलर्भ तस्वीर जिसमें आस्था में डूबे हुए भक्त नजर आ रहे हैं. लंबी-लंबी कतारों में लगकर लोग दर्शनों के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. पूर्व में इस मंदिर का स्वरूप श्रीगणेशजी महाराज का निज मंदिर और एक 14 बाय 12 के एक हॉल था लेकिन अब इसे गोल्डन टेंपल भी कहा जाता हैं क्योंकि मंदिर की गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत चढ़ी हुई हैं और अभी भी सोने की परत चढाने का काम जारी हैं.