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आगे के 100 episodes (1801-1900) मे आप लोग ये जानेंगे कि कैसे 3 साल बाद समर और अन्य अपने छोटे से फ्लैट में अपने दो जुड़वा बेटों के साथ कैसे खुशहाली से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं वह लोग एक हैप्पी फैमिली की तरह अपनी लाइफ स्पेंड कर रहे थे और समर और अन्य ने अपने दोनों बच्चों का नाम अक्षत और कियान रखा था... और उन्होंने अपने दोनों बच्चों का ऐडमिशन ज्ञान दीप डिजिटल स्कूल में करवाया था जहां पर रोज समर अपने दोनों बच्चों को छोड़ने जाया करता था और लंच टाइम में उन्हें पिक करने जाया करता था लेकिन वह घर जाकर कुछ खाया नहीं करता था और वही उसे स्कूल की एक टीचर जो कि उनके उन दोनों की क्लास टीचर भी थी वह हमेशा से समर को जब भी देखी थी तो उसे बहुत ही अच्छा लगता था उसे पहले दिन से ही समर के ऊपर क्रश था जब वह एडमिशन करवाने आया था... और आज भी जब समय अपने दोनों बच्चों को स्कूल छोड़ने गया तो वह अर्पिता ने जब समर को देखा तो मुस्कुराने लगे और इस सब को होते हुए अक्षत और कियान ने भी देखा लेकिन उसे समय उन लोगों ने कुछ नहीं कहा फिर स्कूल की छुट्टी के वक्त सामान्य उन दोनों को लिया कर फिर से घर में छोड़ दिया घर से जाने के बाद उन दोनों ने अक्षत ने किया हमसे कहा कि भाई तूने देखा अर्पिता टीचर पापा को देखकर कैसे मुस्कुरा रहे थे तभी अन्य उनकी यह सब बात सुन लेती है और उसके सीने में एक जलन से उठती है फिर वह एक फैसला करती है कि है कि आज से वही उन दोनों को पिक करने जाया करेगी.... लेकिन अब समर के ऊपर उसके परिवार की पूरी जिम्मेदारी थी जिससे उनकी फाइनेंसियल कंडीशन बहुत अच्छी नहीं थी और वह अपने फ्लैट का किराया भी टाइम से नहीं दे पता था जिससे लेंडर उनके घर के पास आकर रोज तमाशा खड़ा करते थे और ज्ञान और अच्छा रोज यह सब देखते थे जिससे उनके दिमाग में यही चलता रहता है कि कब वह बड़े हो और कितनी जल्दी पैसे कम कर अपने मम्मी पापा को एक अच्छी लाइफ दें.. लेकिन एक दिन वही हुआ जिसका समर को बहुत ही सालों से डर था एक दिन उसकी मां और उसकी बहन दोनों ही उसे स्कूल में आ गई क्योंकि वह स्कूल सिंघानिया ग्रुप के अंदर ही चलता था इसके सीईओ उसके पापा प्रयाग सिंघानिया थे और जब अंशिका सिंघानिया ने अक्षत को देखा तो एक पल को उनको ऐसा लगा कि उनका ही बेटा है जिससे उनको शक हुआ और फिर उन्होंने इसकी तहकीकात शुरू कर दी फिर जब अन्य वहां पर पहुंची तो फिर उन उसे उन्होंने बहुत सवाल किया और फिर उसी से फोन करवा कर सौरभ को भी वही बुला लिया... सौरभ ने वहां जाकर देखा कि उसकी मां और उसकी बहन वहां पर है तो उसके माथे से ठंडा पसीना बहाने लगा कि आखिर उसकी फैमिली ने कैसे मेरी छोटी सी फैमिली का पता लगा लिया कि हम लोग पुणे पर रहते हैं फिर जब अंशिका सौरव को जिंदा देखी है तो उसे रो रो कर कहती है कि अभी तुमको याद नहीं है कभी अपनी मॉम की लेकिन हर्ष अन्य और अपने बच्चों को देखकर कुछ नहीं कहता उनसे कहता है कि तुम लोग यहां से जो इनको कोई गलतफहमी हुई है मैं इनको समझ कर आता हूं... फिर सौरभ उन दोनों को वार्निंग देकर वहां से चला जाता है लेकिन अब वह जान चुका था कि अन्य के अंदर बहुत से सवाल उम्र रहे थे इसलिए वह घर में जाकर अन्य से सारी सच्चाई बयां करने लगता है... और इसके आगे के एपिसोड आपको बहुत ही जल्दी मिल जाएंगे जिससे आप आगे की स्टोरी जान सकेंगे सो प्लीज वेट करें और इंजॉय करें😇😇.... Kahani acchi lagi ho to like👍and share↗️ kare Channel ko subscribe🔔 karna na bhoole......