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आपदा प्रबंधन का परिचय (Introduction to Disaster Management) आपदा प्रबंधन वह संगठित, योजनाबद्ध और समन्वित प्रक्रिया है जिसके माध्यम से प्राकृतिक या मानवजनित आपदाओं से होने वाली जन-धन हानि को कम किया जाता है। इसमें आपदा से पहले की तैयारी, आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया तथा आपदा के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण शामिल होते हैं। आपदा प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य केवल राहत देना नहीं है, बल्कि जोखिम को कम करना, समुदाय को सक्षम बनाना और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ________________________________________ 1.1 आपदा प्रबंधन की आवश्यकता भारत भौगोलिक दृष्टि से विविध और संवेदनशील देश है। यहाँ भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूस्खलन, बिजली गिरना जैसी आपदाएँ बार-बार आती हैं। जनसंख्या घनत्व अधिक होने के कारण आपदाओं का प्रभाव गंभीर होता है। इसलिए एक सुव्यवस्थित आपदा प्रबंधन प्रणाली अत्यंत आवश्यक है। ________________________________________ 2️⃣ आपदा प्रबंधन के उद्देश्य (Objectives of Disaster Management) 1. जन-धन हानि को न्यूनतम करना। 2. आपदा के जोखिम को कम करना। 3. त्वरित राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करना। 4. प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना। 5. समुदाय को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाना। ________________________________________ 3️⃣ आपदा प्रबंधन का चक्र (Disaster Management Cycle) आपदा प्रबंधन एक चक्रीय प्रक्रिया है जिसमें चार मुख्य चरण होते हैं — ________________________________________ (1) शमन (Mitigation) यह आपदा से पहले किया जाने वाला कार्य है। इसका उद्देश्य जोखिम को कम करना होता है। उदाहरण – • भूकंपरोधी भवन निर्माण • बाढ़ नियंत्रण बांध • वृक्षारोपण • भूमि उपयोग योजना शमन दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है। ________________________________________ (2) तैयारी (Preparedness) इस चरण में आपदा आने से पहले तैयारी की जाती है। उदाहरण – • आपदा प्रबंधन योजना बनाना • मॉक ड्रिल कराना • चेतावनी प्रणाली विकसित करना • आपातकालीन सामग्री (First Aid, भोजन, पानी) तैयार रखना तैयारी से घबराहट कम होती है और प्रतिक्रिया बेहतर होती है। ________________________________________ (3) प्रतिक्रिया (Response) यह चरण आपदा के समय लागू होता है। इसमें त्वरित बचाव, राहत और चिकित्सा सहायता शामिल होती है। उदाहरण – • बचाव दल भेजना • घायलों को अस्पताल पहुँचाना • राहत शिविर स्थापित करना इस चरण का उद्देश्य जीवन बचाना होता है। ________________________________________ (4) पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण (Recovery) यह आपदा के बाद का चरण है। इसमें प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन में वापस लाया जाता है। उदाहरण – • घरों का पुनर्निर्माण • आर्थिक सहायता • बुनियादी सुविधाओं की बहाली ________________________________________ 4️⃣ भारत में आपदा प्रबंधन की रूपरेखा (Framework of Disaster Management in India) भारत में आपदा प्रबंधन का कानूनी ढांचा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत स्थापित किया गया है। ________________________________________ 4.1 राष्ट्रीय स्तर (National Level) National Disaster Management Authority (NDMA) यह शीर्ष संस्था है जो नीतियाँ और दिशा-निर्देश बनाती है। इसके अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं। National Disaster Response Force (NDRF) यह विशेष बल है जो आपदा के समय बचाव कार्य करता है। ________________________________________ 4.2 राज्य स्तर (State Level) State Disaster Management Authority (SDMA) प्रत्येक राज्य में यह संस्था कार्य करती है। मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं। ________________________________________ 4.3 जिला स्तर (District Level) District Disaster Management Authority (DDMA) जिलाधिकारी इसके प्रमुख होते हैं। यह स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाएँ लागू करता है। ________________________________________ 5️⃣ आपदा प्रबंधन के मुख्य घटक (Key Components) 1. जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) 2. चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) 3. क्षमता निर्माण (Capacity Building) 4. सामुदायिक भागीदारी 5. समन्वय और संचार ________________________________________ 6️⃣ समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन (Community-Based Disaster Management) आपदा प्रबंधन में स्थानीय समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि लोग जागरूक और प्रशिक्षित हों तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्कूलों, पंचायतों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी आवश्यक है। ________________________________________ 7️⃣ निष्कर्ष आपदा प्रबंधन केवल सरकारी कार्य नहीं है, बल्कि यह सरकार, समुदाय और नागरिकों की संयुक्त जिम्मेदारी है। सही योजना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जन-जागरूकता द्वारा आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है। ________________________________________ 🔄 आपदा प्रबंधन चक्र (Disaster Management Cycle) 1️⃣ परिचय आपदा प्रबंधन चक्र वह सतत (Continuous) और चक्रीय प्रक्रिया है जिसके माध्यम से आपदा से पहले, आपदा के दौरान तथा आपदा के बाद किए जाने वाले सभी कार्यों को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाता है। इसे चक्र (Cycle) इसलिए कहा जाता है क्योंकि एक चरण समाप्त होते ही अगला चरण शुरू हो जाता है और पुनः शमन व तैयारी की प्रक्रिया जारी रहती है। इसका मुख्य उद्देश्य आपदा के जोखिम को कम करना, जन-धन की हानि को न्यूनतम करना तथा प्रभावित लोगों को शीघ्र सामान्य जीवन में वापस लाना है। ________________________________________ 2️⃣ आपदा प्रबंधन चक्र के चरण आपदा प्रबंधन चक्र के चार मुख्य चरण होते हैं — 1. शमन (Mitigation) 2. तैयारी (Preparedness) 3. प्रतिक्रिया (Response) 4. पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण (Recovery) ________________________________________