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भगवद् गीता के अनुसार जीवन की कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें गुप्त रखना ही बुद्धिमानी है। गीता हमें आत्मसंयम, विवेक और मौन का महत्व सिखाती है। पहली बात — अपने भविष्य की योजनाएँ। गीता कहती है कि कर्म करो, फल की चिंता मत करो। योजनाएँ बताने से ऊर्जा बिखरती है। दूसरी बात — अपनी कमजोरियाँ। हर व्यक्ति सहानुभूतिशील नहीं होता, इसलिए अपनी कमज़ोरियों को छुपाकर रखना चाहिए। तीसरी बात — अपने अच्छे कर्म। गीता सिखाती है कि अहंकार त्यागो। अच्छे कर्मों का दिखावा उनके मूल्य को घटा देता है। चौथी बात — मन के गहरे दुख। हर कोई तुम्हारे दर्द को समझे, यह ज़रूरी नहीं। आत्मबल विकसित करना ही समाधान है। पाँचवीं बात — आध्यात्मिक अनुभव। ये अनुभव व्यक्तिगत होते हैं, इन्हें शब्दों में बाँधना अक्सर गलत अर्थ पैदा करता है। छठी बात — अपनी धन-संपत्ति और आय। गीता संतुलन और सादगी सिखाती है; धन का प्रदर्शन ईर्ष्या को जन्म देता है। सातवीं बात — अपने अगले कदम। गीता कहती है—स्थिर बुद्धि वाला व्यक्ति मौन में ही आगे बढ़ता है। याद रखो, मौन और विवेक ही गीता का सच्चा सार है।